कवि-कुन्दन पाटिल
शीर्षक-स्मृतियाँ शेष हैं
राज्य-मध्य प्रदेश(देवास)
सम्पर्क-
स्मृतियाँ शेष हैं
शीर्षक-स्मृतियाँ शेष हैं
राज्य-मध्य प्रदेश(देवास)
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स्मृतियाँ शेष हैं
बचपन के दिन वो हमारें
कितने अछ्छे, कितने सुहानें।
मेरी एक मुस्कान पर तब
चेहरे खिल-खिल जाते थें।
मेरे रुठनें मात्र से ही
मायुसी घर में छा जाती थी।
मेरी हर ख्वाहिस को तब
हर हाल में पुरा किया जाता था।
खेल खिलौनों का अक्सर
अम्बार लगाया जाता था।
मैं जब छोटा बच्चा था
शरारतों पर भी ठहाकें लगते थें।
मेरी हर नादानी पर भी
प्यार दुलार उमड़ा करता था।
किन्तु यह क्या••? मैं तो
हौले हौले बढ़ता जा रहा था।
मेरा बचपन समय के साथ
पिछे छुटता जा रहा था।
मेरे पास आज केवल ओर केवल
स्मृतियाँ बचपन की शेष हैं।
कितने अछ्छे, कितने सुहानें।
मेरी एक मुस्कान पर तब
चेहरे खिल-खिल जाते थें।
मेरे रुठनें मात्र से ही
मायुसी घर में छा जाती थी।
मेरी हर ख्वाहिस को तब
हर हाल में पुरा किया जाता था।
खेल खिलौनों का अक्सर
अम्बार लगाया जाता था।
मैं जब छोटा बच्चा था
शरारतों पर भी ठहाकें लगते थें।
मेरी हर नादानी पर भी
प्यार दुलार उमड़ा करता था।
किन्तु यह क्या••? मैं तो
हौले हौले बढ़ता जा रहा था।
मेरा बचपन समय के साथ
पिछे छुटता जा रहा था।
मेरे पास आज केवल ओर केवल
स्मृतियाँ बचपन की शेष हैं।
कुन्दन पाटिल देवास

Nice papa
ReplyDeleteYou are best
ReplyDeleteDil choo gayi 😭😭💘💘
ReplyDeleteNice
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