Monday, November 4, 2019

बिहार से कवयित्री कंचन प्रभा की रचना- माँ तुम कहाँ हो

कवयित्री-कंचन प्रभा
राज्य- दरभंगा बिहार
शीर्षक- माँ तुम कहाँ हो

    माँ तुम कहाँ हो
माँ तुम कहाँ हो माँ ?
कहाँ हो तुम?
क्यो दूर हो मुझसे?
तुमसे बहुत कुछ कहना है
माँ तुम कहाँ हो माँ?
मुझे गोद में नही लोगी?
लोरी नही सुनओगी?
माँ मैने तो तुम्हे कभी
परेशान भी नही किया
ना मैने कभी तुम्हरा
बुना स्वेटर उघारा था
फिर क्यूँ नाराज हो माँ?
माँ तुम कहाँ हो माँ?
ना मैने कभी काबुली वाले को
बुलाने की जिद की थी
तो फिर क्यूँ रुठी हो माँ ?
माँ तुम कहाँ हो माँ ?
मैने कभी तुम्हारे गोद की
जिद भी तो नही की थी
फिर क्यो नही आती माँ ?
माँ तुम कहाँ हो माँ?
ना मैने बचपन मे तुम्हारी
लिप्स्टिक खराब की थी
तो फिर क्यो गुस्सा हो माँ?
माँ तुम कहाँ हो माँ?
सच कहती हूँ मां
आज मै बहुत अकेली हूँ
और तुम भी छोड़ गई माँ
लौट आओ ना माँ
क्यो छोड़ गई मुझे?
माँ तुम कहाँ हो माँ?
कहाँ हो तुम माँ?
   कंचन प्रभा
दरभंगा, बिहार

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