नाम- अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
विधा- कविता
शीर्षक- धरती के गोद में
राज्य- छत्तीसगढ़ (कवर्धा)
विधा- कविता
शीर्षक- धरती के गोद में
राज्य- छत्तीसगढ़ (कवर्धा)
धरती के गोद में
मानव मन की चंचल
खेल रहा है धरती में
आसमान में काली बादल
वर्षा ऋतु की याद दिलाती
उम्दा हवा चल रही है
प्रकृति में नई शुरुआत
चिड़ियो की चहचहाहट सुनाती है
ठंडी हवा चलती है
मन मोह लेती है
पावन धरती में एक अहसास
पर्वत, झील, नदी, आसमान आदि
धरती के गोद मे सोए है
अद्भुत जीवन की कल्पना की
दुनिया की रंगमंच की कहानी सुनाते
दुनिया को हँसना रोना सिखलाते
ऋतुओं का महत्व बताते
एक नया अनुभव सिखाते है
फूल की सुगंध चारो तरफ बिखरे
एक नई उमंग की याद दिलाती
परछाई की राज बताते
ग्रीष्म ऋतु की सौगात दिलाती है
चारो तरफ हरियाली
धरती के गोद में फैला हुआ
वर्षो पूर्व की कहानी सुनाते
आँचल में सो जाता है।
खेल रहा है धरती में
आसमान में काली बादल
वर्षा ऋतु की याद दिलाती
उम्दा हवा चल रही है
प्रकृति में नई शुरुआत
चिड़ियो की चहचहाहट सुनाती है
ठंडी हवा चलती है
मन मोह लेती है
पावन धरती में एक अहसास
पर्वत, झील, नदी, आसमान आदि
धरती के गोद मे सोए है
अद्भुत जीवन की कल्पना की
दुनिया की रंगमंच की कहानी सुनाते
दुनिया को हँसना रोना सिखलाते
ऋतुओं का महत्व बताते
एक नया अनुभव सिखाते है
फूल की सुगंध चारो तरफ बिखरे
एक नई उमंग की याद दिलाती
परछाई की राज बताते
ग्रीष्म ऋतु की सौगात दिलाती है
चारो तरफ हरियाली
धरती के गोद में फैला हुआ
वर्षो पूर्व की कहानी सुनाते
आँचल में सो जाता है।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

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