रचनाकार - एस के नीरज
राज्य - छत्तीसगढ़
संपर्क - ९९७७०-४५५४०
शीर्षक - " तन्हाई "
राज्य - छत्तीसगढ़
संपर्क - ९९७७०-४५५४०
शीर्षक - " तन्हाई "
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मैं तन्हा था तन्हा हूं तन्हा ही रहूंगा
जीवन भर शायद मैं प्यासा ही रहूंगा
एक आश थी कभी बहारें आएंगी
फूलों की वर्षा चहुं ओर छाएंगी
एक हवा का झोंका आया और
बिखर गया वो सपनों की बहार
एक कशिश लिए दिल में फिरता था
कोई तो होगा मेरा भी हमसफ़र
रेत के घरौंदे थे गए सब बिखर
जब आयी मेरे जीवन में ज्वार
जाने क्यों लगता है अब ऐसे
कि मंजिल इतनी दूर क्यों है
मैं परेशान खुद में सिमटा सा
और वो हैं कि अब तलक भी
हमारे अरमानों और जमाने से
बेखबर अपनी दुनिया में ही चूर हैं
क्या यही जमाने का दस्तूर है
मगर कोई ये तो बताए मुझे कि
मैं अगर आज भी तन्हाई में हूं
तो इसमें मेरा कितना कसूर है ।
- एस के नीरज

बहुत सुंदर
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