कवि-शंकर गोयल
शीर्षक-*भाषा-भावना एवं चिंतन*
सम्पर्क-
_____________________
= भाषा-भावना एवं चिंतन=
करुणा भाव भाषा व विचारों को,
मिलाकर बनती है कविता,
जैसे मां नवजात शिशु से,
किशोर होने पर बोध, कराती है अच्छे बुरे का। वैसे ही जैसे कविता भी बोध,
कराती है समाज की विसंगतियों एवं विद्रूपताओं का।
मां युवा बेटे को,
आस्था एवं आत्मविश्वास का,
पाठ पढ़ाती है ताकि, जीवन में हर कदम पर, सफलता उसके साथ रहे।
वैसे ही कविता भी बताती है,
जन भावनाओं को,
गरीबी, अशिक्षा व अन्य समस्याओं से जूझने का? सहज एवं निश्चित पथ।।
✍- शंकर गोयल
शीर्षक-*भाषा-भावना एवं चिंतन*
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= भाषा-भावना एवं चिंतन=
करुणा भाव भाषा व विचारों को,
मिलाकर बनती है कविता,
जैसे मां नवजात शिशु से,
किशोर होने पर बोध, कराती है अच्छे बुरे का। वैसे ही जैसे कविता भी बोध,
कराती है समाज की विसंगतियों एवं विद्रूपताओं का।
मां युवा बेटे को,
आस्था एवं आत्मविश्वास का,
पाठ पढ़ाती है ताकि, जीवन में हर कदम पर, सफलता उसके साथ रहे।
वैसे ही कविता भी बताती है,
जन भावनाओं को,
गरीबी, अशिक्षा व अन्य समस्याओं से जूझने का? सहज एवं निश्चित पथ।।
✍- शंकर गोयल

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