कवि डॉ संजीव शमा
झंझारपुर , मधुबनी, बिहार
मो. - 9934430045
शीर्षक : उलझन
सो कर क्या चिंता मिटेगी
या हर समस्या सुलझेगी
नींद से जागना होगा तुझे
अंधेरा मिटाना होगा तुझे
नवजीवन नव प्रात के लिए
चारों ओर उजाला लाना होगा
ये जीवन एक उलझन है
सुलझाना होगा तुझे
यूं ही बीत न जाये घड़ियां
हर पल हर घड़ी चेतना होगा तुझे
धैर्य रखना होगा
आशा की डोर को थामना होगा तुझे
रणछोड़ नहीं रण विजय बनना होगा
तब मिटेगा अंधेरा
सुलझेगा जीवन
नहीं रहेगी उलझन ।
- डॉ संजीव शमा
झंझारपुर, मधुबनी
जीवन की सच्चाई से रू-ब-रू कराती अद्भुत रचना। ऐसे हीं आप कलम चलाते रहें और जीवन का अंधेरा मिटाते रहें।
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