नाम- माधवी गणवीर
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- सुनहरे पल खो रहे है।
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- सुनहरे पल खो रहे है।
अद्भुत है राग जीवन का
लगता है सब एक हो रहे है।
जाग रही हुं मैं जब
सब सो रहे है।
लगता है सब एक हो रहे है।
जाग रही हुं मैं जब
सब सो रहे है।
व्यर्थ के आक्रोश औऱ
तनातनी में,
लगता नही सुनहरे पल
हम खो रहे है।
तनातनी में,
लगता नही सुनहरे पल
हम खो रहे है।
लोगो का क्या वो तो
कुछ भी कहेगे,
हम क्यो रिश्तो में
कांटे बो रहे हैं।
कुछ भी कहेगे,
हम क्यो रिश्तो में
कांटे बो रहे हैं।
नही कोई विश्वास
समझौते की कोई बात,
हर वक्त तभी तो
हम रो रहे है।
समझौते की कोई बात,
हर वक्त तभी तो
हम रो रहे है।
पाप पुण्य का हिसाब
मैं नही जानती,
आशुओ से दामन,
फिर भी धो रहे है।
मैं नही जानती,
आशुओ से दामन,
फिर भी धो रहे है।
माधवी गणवीर

बहुत खूब लिखा है आपने
ReplyDeleteसुंदर भावानुभूति
ReplyDeleteसार्थक कविता
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