Monday, November 18, 2019

बिहार से गणपति सिंह की रचना- कातिक के महिनवा

नाम :- गणपति सिंह
राज्य :- बिहार
विधा :- भोजपुरी गीत
शीर्षक :- कातिक के महिनवा
      कातिक के महिनवा
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कातिक  के  महिनवा  बाड़ा  पावन हे।
गंगा के नहान लागे बाड़ा मनभावन हे।।
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थोड़े थोड़े सिहरावन लागे
गंगा माई के किनारे सुहावन लागे
कके नहान सभे करे सतुआ मुरई के भोग लगावन हे।
कातिक के महिनवा......
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गंगा माई के कोसिआ भराला
लइकन सभ के भारा उतराला
बाजेला बाजावा लागेला बाड़ा सुहावन हे।
कातिक के महिनवा...
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एक से एक चिजवा बिकेला हो घाटे
अइसन गंगा माई के  नेहिया हो बाटे
बबुआ के माई अँचरा पर नचनिया करे नचावन हे।
कातिक के महिनवा.......
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गंगा  माई के घाटे सभे दिअरी जरावे
करत आरती सभे देव दिवाली मनावे
गणपति करस फल फूल माई के चढ़ावन हे।
कातिक के महिनवा......
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©️®️
गणपति सिंह
छपरा बिहार

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