कवि - मूलचंद सैनी
राज्य राजस्थान
शीर्षक - वाह रे नेता !
राज्य राजस्थान
शीर्षक - वाह रे नेता !
सरेआम किसी अफसर को धमकाता है,
खुलेआम नियम कायदे तोड़ देता है।
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
खुलेआम नियम कायदे तोड़ देता है।
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
झूठे वादे करके जनता को बरगलाता है,
रिश्वत खाकर घोटालों की बाढ़ लाता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
गरीबों की बस्ती में गन्दे बच्चे को गोद लेता है,
भाषण में पल में हँसता है पल में रो लेता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
सुपारियों का बड़ा व्यवसाय करता है,
बिना पैसे तबादला उद्योग चलाता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
बुढ़ापे में भी कुर्सी का मोह रखता है,
अपरिमित शक्तियों का मालिक होता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
रिश्वत खाकर घोटालों की बाढ़ लाता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
गरीबों की बस्ती में गन्दे बच्चे को गोद लेता है,
भाषण में पल में हँसता है पल में रो लेता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
सुपारियों का बड़ा व्यवसाय करता है,
बिना पैसे तबादला उद्योग चलाता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
बुढ़ापे में भी कुर्सी का मोह रखता है,
अपरिमित शक्तियों का मालिक होता है,
वाह रे नेता तेरा बड़ा कमाल है।
मूलचन्द सैनी

तनसुख
ReplyDeleteवा जी मूल जी थे भी बडा कमाल लिखो हो