Monday, November 18, 2019

राजस्थान से कुमार तनसुख की रचना- गुजार दी यूं ही उमर

कुमार तनसुख
श्रीमाधोपुर ,राजस्थान
गज़ल- गुजार दी यूं ही उमर
मो 9351212400

नही रही वो बात अब इस भरे ज़माने में  ।
गुजारदी यूं ही उमर खुद कोआजमाने में  ।।
अफ़सोस मिट जाने का नही मगर ये है।
कि मेरा नाम भी ना आया इस फसाने में  ।।
जिनको चाहा था वो ही सितमगर हो गए
मिला क्या  सुकून उन्हें दिल मेरा दुखाने में  ।।
रहनुमा थे मगर भूल ये गए वो कि ।
मिलता नहीँ खुदा किसी को यूं सताने  में   ।।
अब भी आए हैं पर चेहरे पर सिकन तक नहीं ।
लोग तैयार है तनसुख चिता को आग लगाने में  ।।
                                 कुमार तनसुख

17 comments:

  1. वाह क्या बात है।

    ReplyDelete
  2. वाह जी बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  3. कवि ने अपनी रचना में मैरी भी बात कह दी

    ReplyDelete
  4. Nice one bhiya hurtful line👌👌👌

    ReplyDelete
  5. बेहद उम्दा लेखन

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...