बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राजस्थान
शीर्षक - - पिया का घर
राजस्थान
शीर्षक - - पिया का घर
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हूँ।
पल-पल सहनशीलता, समर्पण, क्षमा सिखलाती हूँ।
रंग-बिरंगे कांच के कंगन,
चीनी मिट्टी के वो छोटे छोटे बर्तन,
नीम की डाली पर छोटा-सा झूला,
सारे अधखिले सपने मोड़ आती हूँ।
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हूँ।
वो सखियाँ, गांव, गली, आंगन,
भाई-भौजाई, माँ का आंचल,
मिट्टी का वो सजीला घर,
सुंदर गुड़िया औ उसका काना वर,
संभाला था जिन्हें, तोड़ आती हूँ।
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हू।
तन के रक्त की बूंद बूंद से पोषित,
नव सृष्टि संसार में लाती हूँ।
वो कष्ट, पीड़ा और यंत्रणा सब,
ममत्व में भूल जाती हूँ।
संतति की बस एक स्निग्ध स्मित से,
आनन्द के उत्ताल सागर में झूम जाती हूँ।
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हूँ।
पल-पल सहनशीलता, समर्पण, क्षमा सिखलाती हूँ।
रंग-बिरंगे कांच के कंगन,
चीनी मिट्टी के वो छोटे छोटे बर्तन,
नीम की डाली पर छोटा-सा झूला,
सारे अधखिले सपने मोड़ आती हूँ।
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हूँ।
वो सखियाँ, गांव, गली, आंगन,
भाई-भौजाई, माँ का आंचल,
मिट्टी का वो सजीला घर,
सुंदर गुड़िया औ उसका काना वर,
संभाला था जिन्हें, तोड़ आती हूँ।
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हू।
तन के रक्त की बूंद बूंद से पोषित,
नव सृष्टि संसार में लाती हूँ।
वो कष्ट, पीड़ा और यंत्रणा सब,
ममत्व में भूल जाती हूँ।
संतति की बस एक स्निग्ध स्मित से,
आनन्द के उत्ताल सागर में झूम जाती हूँ।
पिता का घर छोड़, पिया का घर बसाती हूँ।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"

👌👌👌
ReplyDeleteरियल में सर इस रचना ने तो अंतकरण को छू लिया
ReplyDelete👌 👌 एक लड़की की वास्तविक सच्चाई आपने व्यक्त की है।
ReplyDelete👏👏👏🙏🙏🙏
Delete👌
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteधन्यवाद सभी साथियों का
ReplyDeleteनारी की पूर्णता को दर्शाती श्रेष्ठ रचना। गागर में सागर भर दिया, गुरु ।
ReplyDeleteत्याग , समर्पण,स्नेह, आदर्श, संस्कार , कर्त्तव्य निष्ठा, सामंजस्यता, संवेदना , एकनिष्ठ प्रेम भावना आदि मानवीय मूल्यों से पुरित आपकी रचना अनुपम है।
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
DeleteGood
ReplyDeleteअधखिले सपने.... मां का आंचल... कितना मार्मिक है, कल्पना मात्र से सांसें रुक जाये, लेकिन धन्य है नारी...
ReplyDeleteRight thinking
Deleteआभार भाई साहब
Deleteतनसुख कुमावत
ReplyDeleteशानदार रचना गुरू
तनसुख भाई को नमस्कार
Deletesandar gurudev
ReplyDeleteअति सुन्दर
ReplyDeleteAdbhut rachana
ReplyDeleteअपनी प्रतिक्रिया देने के लिए आपका हार्दिक आभार
ReplyDeleteबहुत अच्छी कविता
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
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