कवयित्री-कंचन प्रभा
राज्य-दरभंगा,बिहार
शीर्षक- मै पराई हूँ
सम्पर्क-
राज्य-दरभंगा,बिहार
शीर्षक- मै पराई हूँ
सम्पर्क-
मै पराई हूँ
कैसी ये दुनिया है हरजाई
जिसने ये एक शब्द बनाई
मै कौन हूँ घर कहाँ मेरा
सब कहते मुझको तो पराई
जिसने ये एक शब्द बनाई
मै कौन हूँ घर कहाँ मेरा
सब कहते मुझको तो पराई
जब मै इस धरती पर आई
सबकी लाड़ से मुस्काई
सब ने फिर मुझे याद दिलाया
लड़की तो होती है पराई
सबकी लाड़ से मुस्काई
सब ने फिर मुझे याद दिलाया
लड़की तो होती है पराई
ये क्या अम्मा तु ही बता दे
तु तो अपना राज जता दे
या तुझ मे भी वही बात समाई
तु भी मुझको कहे पराई
तु तो अपना राज जता दे
या तुझ मे भी वही बात समाई
तु भी मुझको कहे पराई
फिर सब ने मुझे किया विदाई
साजन के घर डोली चढ़ आई
सबसे मिलजुल घर तो बसाई
फिर भी मै कही गई पराई
साजन के घर डोली चढ़ आई
सबसे मिलजुल घर तो बसाई
फिर भी मै कही गई पराई
ये तो पिया का घर बतलाया
ससुराल मे भी मै कही गई पराई
भगवान ने ही ये नियम बनाई
औरतों के लिये घर कहाँ बनाई
ससुराल मे भी मै कही गई पराई
भगवान ने ही ये नियम बनाई
औरतों के लिये घर कहाँ बनाई
कंचन प्रभा

Heart touching, sooper
ReplyDeleteBohot achhe..... Nice lines....
ReplyDeleteBohot achhe..... Nice lines....
ReplyDeleteNice lines
ReplyDeleteBahut khub nice line
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