नाम - सुभाष सैनी "सृजन"
शीर्षक - देव दीवाली अाई है
राज्य -, राजस्थान
संपर्क सूत्र - 9001019002
शीर्षक - देव दीवाली अाई है
राज्य -, राजस्थान
संपर्क सूत्र - 9001019002
........देव दीवाली अाई है .......
अवनी से लेकर अम्बर तक,
ज्योतिर्मय आभा छाई है।
मोक्षदायिनी शिवनगरी में,
आज देव दीवाली अाई है ।।
तन उल्लसित मन उल्लसित,
कण कण में खुशियां छाई है।
देवगणों का अर्चन करने ,
आज देव दीवाली अाई है।।
हे देव! पधारो तुम दिव्य धरा पर ,
सुधियां मन में हरषाई है ।
संतप्त जनों के ताप हरो तुम,
आज देव दीवाली अाई है।।
नववधू - सी श्रृंगारित सुरसरिता,
तन मन से हरषाई है।
स्वजनों का पाकर संगम ,
आज देव दीवाली अाई है।।
दीप जलाओ दिल न जलाओ,
इक - दूजे को गले लगाओ।
समरसता का संचार करने ,
आज देव दीवाली अाई है।।
ज्योतिर्मय आभा छाई है।
मोक्षदायिनी शिवनगरी में,
आज देव दीवाली अाई है ।।
तन उल्लसित मन उल्लसित,
कण कण में खुशियां छाई है।
देवगणों का अर्चन करने ,
आज देव दीवाली अाई है।।
हे देव! पधारो तुम दिव्य धरा पर ,
सुधियां मन में हरषाई है ।
संतप्त जनों के ताप हरो तुम,
आज देव दीवाली अाई है।।
नववधू - सी श्रृंगारित सुरसरिता,
तन मन से हरषाई है।
स्वजनों का पाकर संगम ,
आज देव दीवाली अाई है।।
दीप जलाओ दिल न जलाओ,
इक - दूजे को गले लगाओ।
समरसता का संचार करने ,
आज देव दीवाली अाई है।।
सर्वाधिकार सुरक्षित - मौलिक रचना

शानदार शब्द संयोजन और अद्भुत भाव योजना
ReplyDeleteहार्दिक आभार आपका भाई साहब
DeleteSandar sir ji
ReplyDeleteहार्दिक आभार आपका प्रोत्साहित करने के लिए
DeleteVery Nice Subhash Ji.
ReplyDeleteWaah waah kya bat hai sir ....shaandar
ReplyDeleteहार्दिक आभार आपका प्रोत्साहित करने के लिए
DeleteVery good मेरे प्रिय आदर्श गुरुजी
ReplyDeleteThanks
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