नाम...नलिनी बाजपेयी
शीर्षक...पीड़ा
राज्य...छत्तीसगढ़।
शीर्षक...पीड़ा
राज्य...छत्तीसगढ़।
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पीड़ा
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पीड़ा से तड़पता मेरा जीवन,
बादल सा बरसता मेरा जीवन।
पीड़ा
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पीड़ा से तड़पता मेरा जीवन,
बादल सा बरसता मेरा जीवन।
आंसूओं के बरसात से भीगा है मेरा दामन,
दिल में छिपी पीड़ा है कितना पावन।।
पीड़ा को मैंने सहर्ष अपनाया,
नयन तुम्हारे क्यों भरमाएं?
दिल में छिपी पीड़ा है कितना पावन।।
पीड़ा को मैंने सहर्ष अपनाया,
नयन तुम्हारे क्यों भरमाएं?
डूबती नैया साहिल को खोजता है,
भटका राही मंजिल को खोजता है।।
पीड़ा से तो मैं तड़पी,
हिय तुम्हारे क्यों अकुलाएं?
भटका राही मंजिल को खोजता है।।
पीड़ा से तो मैं तड़पी,
हिय तुम्हारे क्यों अकुलाएं?
मैं यायावरी बन दर-दर भटकी,
राह अकेली
चली हिय में टीस भरी कलियां चटकी।
पीड़ा का मोल ना आंका,
मगर हर बार तुम क्यों घबराएं?
राह अकेली
चली हिय में टीस भरी कलियां चटकी।
पीड़ा का मोल ना आंका,
मगर हर बार तुम क्यों घबराएं?
दर्द सौगात बनकर आया,
मगर सहा जाता नहीं।
पीड़ा ही पीड़ा सूना बीयांवन
जीवन में
नयन तुम्हारे क्यों आकुलाएं?
मगर सहा जाता नहीं।
पीड़ा ही पीड़ा सूना बीयांवन
जीवन में
नयन तुम्हारे क्यों आकुलाएं?
मेरी हर सिसकी पर तुम अकुलाते,
सम्बन्धों की बात चली तब क्यों सकुचाते?
पीड़ा सह दधीचि बन विश्वासों के दान से
बोलो तुम क्यों हड़ बडाएं ?
सम्बन्धों की बात चली तब क्यों सकुचाते?
पीड़ा सह दधीचि बन विश्वासों के दान से
बोलो तुम क्यों हड़ बडाएं ?
पीड़ा से तड़पता मेरा जीवन,
बादल सा बरसता मेरा। जीवन।
बादल सा बरसता मेरा। जीवन।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ.ग.)
संबलपुर,कांकेर (छ.ग.)

पीकर पीड़ा जो पलते हैं, वे ही दीपक बन जलते हैं।।
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