कवि :- फरूण कुमार यादव
शीर्षक :- भ्रष्ट से हम नष्ट
राज्य :- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 6268201025
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शीर्षक :- भ्रष्ट से हम नष्ट
राज्य :- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 6268201025
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...भ्रष्ट से हम नष्ट...
निकाला था वेकैंसी,
मेरा भी तैयारी चल रहा था।
मेरा भी तैयारी चल रहा था।
महाशय जेब भर रहे थे,
नियम बदल रहा था।
नियम बदल रहा था।
नियम कुछ ऐसा था
कि हम घर आ गए,
कि हम घर आ गए,
डिग्रियाँ पर जंग लग गई,
उम्र दीमक खा गए।
उम्र दीमक खा गए।
सोचा था सँवार लुँगा
अपनी जिंदगी को,
अपनी जिंदगी को,
पर अब पता चला...
पहले साफ करना होगा,
इस गंदगी को।
इस गंदगी को।
क्योंकि...
इस गंदगी से ही फैली
बेरोजगारी है,
इस गंदगी से ही फैली
बेरोजगारी है,
और हमारे देश में...
करोंड़ों लोगों को
लगी ये बीमारी है।
करोंड़ों लोगों को
लगी ये बीमारी है।
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फरूण कुमार यादव
जाँजगीर-चाम्पा,छ.ग.
जाँजगीर-चाम्पा,छ.ग.

सही बात है सर
ReplyDeleteReal talk
ReplyDeleteसही है
ReplyDeletetrue sir
ReplyDeleteDeep thought sir
ReplyDelete100% right
ReplyDeleteReality poem....👏
ReplyDelete👏👏👏👏👌👌👌👌
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteThanks all...👏
ReplyDeleteSuper se bhi uper sir ji
ReplyDeletegood sir
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