महासमुन्द(क.प.)|| अपनी बात लोगों तक रखने के लिए सोशल मीडिया वर्तमान दौर में अद्वितीय अनुप्रयोग है।समय के साथ-साथ हम सभी सोशल मीडिया के लगभग आदी बनते जा रहे है। प्रात: नींद खूलते ही स्टेट्स अपडेट से लेकर कितने लाईक्स, कमेंट्स पूर्व दिवस के अपलोडेड सामाग्री पर हमें मिले, इसकी चिंता हमें सर्वप्रथम मोबाईल फोन्स की ओर खींच लेता है। इसके साथ ही हमें अप-टू-डेट भी करता है कि किस व्यक्ति ने सोशल साईट्स पर क्या धमाल मचा रखा है।
सोशल मीडिया,ग्लोबल विलेज का एक सर्वोत्तम उदाहरण है। समय और लोगों में बढ़ते क्रेज़ के चलते, सोशल साईट्स की बाढ़ आ गई है। टैक्स्ट,विडियों, गेमिंग और लाईव जैसे कई प्रकार के अत्याधुनिक संशाधनों से लैश सोशल प्लेट्फार्म का नशा लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। लोगों में लोकप्रियता और अपने क्षेत्र विशेष अभिरूचि के अनुसार विडियों,टैक्स्ट,तस्वीरें, डीजिटल जीआईएफ तक को सोशल प्लेट्फार्म में शेयर कर रहे है।
सोशल मीडिया की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की सोशल मीडिया में किसी छूपे प्रतिभा का हल्का वाईरल ट्रेंड मिल जाये तो वह फनकार रातों-रात स्टार बन जाये। सोशल मीडिया के चलते कई छूपे हुनर भी लोगों के बीच पहुच रहे है।
वर्तमान समय में सोशल मीडिया के बूते शोहरत पाने वाले कई व्यक्तित्व से आप भी पक्का वाकिफ तो अवश्य ही होगें।
सोशल मीडिया का यह प्रारूप तो लाजमी है की ग्लोबल विलेज़ का सबसे जानदार अनुभव है। सोशल मीडिया कई क्षेत्रों में मद्दगार की भूमिका का उल्लेख भी आवश्यक है। सोशल प्लेट्फार्म फ्रिडम आफ एक्सप्रेशन के लिए भी सही प्लेटफार्म है। जहां किसी की शिकायत अब फाईलों में दबी नही रहती, बल्की लोगों के बीच पहुच कर्रवाई तक करा देती है।
इसी प्रकार सोशल मीडिया के लाभ कई है। लेकिन सोशल मीडिया का दूसरा रूप यह भी है कि सोशल मीडिया में अफवाहों की आवाजाही रहती है। बेबुनियाद और समाज विरोधी तत्वों के द्वारा मनगढ़त कई डीजिटल प्लेट्फार्म में गढ़ी कहानियों में अमेल तर्कों का छौंक मारकर सोशल प्लेट्फार्म में ऐसे परोसा जाता है कि वह वास्तविक लगने लगती है। एेसे वाईरस संदेशों की भाषा शैली इतनी उत्तेजक भी हो सकती है कि आप स्वमेंव ही उस संदेश,टैक्स्ट, पोस्ट या विडियों के अंधअनुयायी होकर फारवर्ड का प्रतिषाद अवश्य दे बैठते है। ऐसे ही फारवर्ड संदेश धीरे-धीरे लोगों के विचारधारा में परिवर्तन ला देता है। हो सकता संदेश से किसी समुह विशेष या क्षेत्र विशेष या समुदाय विशेष प्रति टिप्पणी हो, तो अवश्य है की इसके परिणाम स्वरूप सामाजिक हिंसा का प्रदर्शित हो। सोशल प्लेट्फार्म के उपयोगकर्ताओं को अब जागरूक होना आवश्यक है कि कहीं वह सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं या दूरूपयोग,नहीं तो वह दिन दूर नहीं कि सोशल मीडिया-शोषण मीडिया बनने पर आमादा हो जाये।
Friday, November 1, 2019
कहीं सोशल मीडिया से शोषण मीडिया की ओर तो नहीं- पुखराज यादव
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दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
बहुत सही है महोदय जी
ReplyDelete👌👌👌
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