Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि संतोष श्रीवास्तव सम की रचना- आया शरद है


नाम_ संतोष श्रीवास्तव सम
राज्य _छत्तीसगढ
मोबाइल ९९९३८१९४२९
शीर्षक _ आया शरद है
_____________
आया शरद है
__________
मेरे दरवाजे पर,
किसी ने दस्तक दी,
मैने पूछा कौन है,
उसने कहा _
साहब दरवाजे खोलो,
मैं शरद हूं।
मैने दरवाजा खोला,
बाहर तीक्ष्ण चांदनी,
निखरी थी,
शीतल हवाएं,
अपने आगोश में,
सभी को,
लिये जा रही थी,
हर ओर सुनहरा द़श्य था,
लोगों का शोर था।
मै हतप़भ था,
आखिर मै समझ ही गया।
यह शरद ऐसे ही आता है,
घोर निराशा हो,
या कोई दुख,
हर वर्ष हमको उससे,
परे रख,
जीवन मंहकाता है।
यह शरद ऐसे ही आता है।
_. संतोष श्रीवास्तव सम
      बरदे भाटा,कांकेर।छग।

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