नाम - शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक - मिट्टी व पुरूषार्थ
सम्पर्क -9098518976
पता -पेंडरवानी,बालोद ,छ. ग.
शीर्षक - मिट्टी व पुरूषार्थ
सम्पर्क -9098518976
पता -पेंडरवानी,बालोद ,छ. ग.
मिट्टी व पुरुषार्थ
मिट्टी का तन , मिट्टी का मन ,
मिट्टी का ही पूरा जीवन ,
मिट्टी जरा ,मिट्टी बचपन ,
मिट्टी रस छलकाती यौवन ,
मिट्टी अपने ,मिट्टी पराये ,
मिट्टी-मिट्टी में भेद बताये ,
मिट्टी रिश्ते ,मिट्टी सपनें ,
मिट्टी मिट्टी से क्या निभाये ,
मिट्टी-मिट्टी में भेद बताये ,
मिट्टी रिश्ते ,मिट्टी सपनें ,
मिट्टी मिट्टी से क्या निभाये ,
मिट्टी तेरी महल -अटारी ,
मिट्टी तेरी चार दिवारी ,
मिट्टी रंग तमाशे सब ये ,
मिट्टी ही है, दुनिया सारी ,
मिट्टी तेरी चार दिवारी ,
मिट्टी रंग तमाशे सब ये ,
मिट्टी ही है, दुनिया सारी ,
मान जरा मिट्टी (तन)के रहते ,
सुन जरा मिट्टी (बड़ो ,संतो ) के कहते,
कब से तू भटक रहा है ,
मिट्टी में ही अटक रहा है ,
सुन जरा मिट्टी (बड़ो ,संतो ) के कहते,
कब से तू भटक रहा है ,
मिट्टी में ही अटक रहा है ,
मैं मेरी में लूट मची है ,
मन के चाल में टूट मची है ,
सब जग मिट्टी नासमझ न समझे ,
मिट्टी पर अभिमान के चलते ,
मन के चाल में टूट मची है ,
सब जग मिट्टी नासमझ न समझे ,
मिट्टी पर अभिमान के चलते ,
पर ये मिट्टी कह रही है, पुरुषार्थ कभी मरता नही ,
पर ये मिट्टी कह रही है ,उद्यमी कभी डरता नही ,
ये मिट्टी कह रही है ,जीवन में श्रम साधो तुम ,
नाना रूपों में श्रम बिन ,जग में नाम कोई करता नही ,
पर ये मिट्टी कह रही है ,उद्यमी कभी डरता नही ,
ये मिट्टी कह रही है ,जीवन में श्रम साधो तुम ,
नाना रूपों में श्रम बिन ,जग में नाम कोई करता नही ,
- शैलेन्द्र चेलक -

एक बार पुनः बहुत बहुत बधाई
ReplyDeleteधन्यवाद जी
DeleteYou are the best sir
Delete,👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteNice sir ji
ReplyDeleteWelcome sir
ReplyDeleteBahut achh sir
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