Tuesday, October 22, 2019

छ. ग. से कवि शैलेन्द्र चेलक की रचना- पराया कौन ?

नाम - शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक -पराया कौन ?
सम्पर्क - 9098518976
पता - पेंडरवानी ,बालोद,छ. ग.


      पराया कौन ?
संसार समुद्र में जीवन नैया ,
चलती रहती गोता खाते ,
सुख की लहरें ,दुख की खाई ,
दोनों से अपनापन निभाते ,
खुशियां सपना , गम जो अपना ,
क्यूं अपने- पराये का भेद बताते ,
पल -पल , छिन - छिन आते -जाते,
रिश्ते जिन्हें हम अपना कहते ,
जिनके लिए भाववश बहते ,
भावशून्य होकर क्यूं वे ?
अपनों का न साथ निभाते ,
अगर निभाते अपनापन तो ,
पढ़ पाते दूजे का मन तो ,
जरा जननी विवश होकर क्यों ?
घर छोड़ वनवास(वृद्धाश्रम )को जाते ,
जहाँ ऐसे कितने अभागे ,
रहते हैं संताप के मारे ,
इक - दूजे के बनके सहारे ,
अपनों के बीच , अपनों से हारे ,
कुछ मुझसे बदतर ,मेरे जैसे ,
बस स्टैंड ,रेल्वे स्टेशन ,
चौक - चौराहों पर , दर -दर ,
दो रोटी को भटक रहें हैं ,
क्या उनका कोई न अपना ?
या अपनो के गले में अटक रहें हैं ,
जिनके रग में अपना खून बहता ,
उन्हें क्यूं एहसास नही ?
जीवन जिन्हें अर्पित कर दी ,
वे क्यूं मेरे पास नही ?
यहाँ पराये ,अपनो सा निभाते ,
वहां दो रोटी देने को न थे ,
यहां स्नेह से मन अघाते ,
बार - बार उठता मन में ,
मैं किनका ? पराया कौन ?
मुझ जैसो का मन क्यूं न समझ  पाते ?
             - शैलेन्द्र चेलक -

2 comments:

  1. You are the best sir
    बहुत ही सुन्दर पंक्तियां

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