Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री नीता झा की रचना- माँ तुम आती हो

शिर्षक-माँ तुम आती हो
कवयित्री-नीता झा
स्थान-छत्तीसगढ़
माँ तुम आती हो

संग अम्मा लोगों को लाती हो
मन गदगद हो जाता है
सासु माँ और अम्मा की यादों से
त्योहार समपूर्ण हो जाता है
कितनी यादें त्योहारों की मचलती
जब तैयारियांं किया करती हूं
कितना मोयन,कितनी शक्कर,
कितने पकवानों के भोग लगाऊं
मेरे मानसपटल में समाई दोनों
ममता भरी देती रहती हिदायतें
माँ तुम आता हो
संग अम्मा लोगों को लाती हो
दिवाली की साफ सफाई में
पुराने रस्मो को सहेजती जब
मन भावुक कर लेती हूं
चुपके से कुछ मीठी यादें
मेरे अन्तस् में भर देती हो
थकी हुई जब होती निढाल
श्रंगार सोलह करने उकसाती हो
बड़ा सुहाना लगता त्योहार माँ
तुम सब मेरे संस्कारों में बसती हो
नीता झा
मौलिक,स्वरचित

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