कुमार तनसुख
श्रीमाधोपुर
राजस्थान
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गजल
शीर्षक-तुम्हीं को चाहूँ
तुम्हीं को चाहूं तुम्हीं पर
ये जा निसार करू ।
कहुं तो कैसे सनम कितना
तुम्हें प्यार करू ।।
तुम्हीं को.........
मेरा अरमान हो तुम
मेरी चाहत भी तू है ।
खुदा से में जो करू
वो इबादत भी तू है।।
कहुं तो...........
तू ही एक ख्वाब मेरा
मेरी मंजिल भी तू है।
तेरे सिवा में बता किसका
एतबार करू ।
तुम्हीं को.......
जिसके सजदे में झुकू
वो बंदगी भी तू है ।
जिये तो कैसे बता ये
जिन्दगी भी तू है ।
तुम्हीं को.........
दिवाना हूँ मैं तेरा इल्म
ये तुमको नहीं ।
तुझ पे हो जाउ फना इसका
मैं इजहार करू ।।
तुम्हीं को .....
कुमार तनसुख
Shaandaar..
ReplyDeleteअर वा जीजी
Deleteबहुत ही प्यारी कविता लिखी भाई
ReplyDeleteधन्यवाद महावीर भाई
Deleteवाह सखा वाह 😊👌क्या बात है... बहुत सुन्दर
ReplyDeleteजय हो तेरी 🙏🙏🙏
Deletevery nice
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
Deleteलिखूं तो .....
ReplyDeleteक्या शब्द लिखूं आपके लिए
वो शब्द नही बना इस सृजन के लिए
धन्यवाद सर
DeleteKya bat h
ReplyDeleteधन्यवाद जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
ReplyDeleteBehad khoobsurat
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