Friday, October 18, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री देविका साहू की रचना- हे ईश्वर! उद्धार करो


नाम-श्रीमती देविका साहू
रायपुर(छत्तीसगढ़)
विधा: कविता
शीर्षक: हे ईश्वर! उद्धार करो

हे खुदा हे ईश्वर आज मन में द्वन्द विचार है
कि य़दि खुदा है यदि ईश्वर है तो क्यों ये हाहाकार है
देख ज़रा तेरी धरती पर कैसा  नरसंहार है
कहते हैं बच्चों में सुलह कराना पिता का अधिकार है
फिर क्यों आपके होते रोये ये संसार है
माएं रोये बीवी रोये बच्चे भी हैरान हैं
लगे पूछने अपनी माँ से क्या हम कसूरवार हैं
क्यों माँ हर जगह बहे खून की धार है
नहीं महफूज़ कहीं भी हम ,होता डर का सामना बार बार है
हे खुदा हे ईश्वर अब तो कोई उपाये करो
लांघ गया बार्दाशत की सीमा अब ये उत्पात है
सब तो हैं इस धरा के बच्चे अब इनको समझाओ
सबका अंत ही सच है अब  इनको य़ाद दिलाओ
नहीं समझ जो आती बात तो इनको सबक सिखाओ
बहुत हुआ अब हिन्दू मुसलिम
इनको नानी याद दिलाओ
किसकी है ये कठपुतलियां ,कौन इनका सरदार है
दो सज़ा अब तो इनको भी मेरी बस यही दरकार है
रोती बेवा सूनी गोदों का अब तो इंसाफ करो
धरती में हो अमन चैन अब ऐसा चमत्कार करो
अब ऐसा चमत्कार करो !!

3 comments:

  1. Thanks for posting this poem of a budding poetess like me..tha thafor encouragement sir💐🙏

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  2. Thanks for posting this poem of a budding poetess like me..thanks for encouragement sir💐🙏

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  3. Very nice lines dev ..proud of u

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