नाम--कुसुम शर्मा अंतरा
विधा----ग़ज़ल
जम्मू कश्मीर
विधा----ग़ज़ल
जम्मू कश्मीर
मैं तो हूँ अंदर ये बाहर कौन है
पूछता मुझसे ये अक्सर कौन है
पूछता मुझसे ये अक्सर कौन है
छुप गया घर की दर-ओ-दिवार में
नींव का बन कर ये पत्थर कौन है
नींव का बन कर ये पत्थर कौन है
नक्श उनके खींच लो हर ओर अब
कह रहा मौसम से आकर कौन है
कह रहा मौसम से आकर कौन है
क्यों कुरेदे जा रहा है ज़ख़्म वो
ढूंढ कर देखो वो शायर कौन है
ढूंढ कर देखो वो शायर कौन है
कुछ मुसलसल बह रहे हैं दर्द यह
बांधकर लाया समंदर कौन है
बांधकर लाया समंदर कौन है
हर कदम हम फूँक कर रखते रहे
हादसे करता मुकर्रर कौन है
हादसे करता मुकर्रर कौन है
कौन है शतरंज की इस चाल में
बो रहा सारे ये मंज़र कौन है
बो रहा सारे ये मंज़र कौन है
कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
जम्मू कश्मीर

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