Tuesday, October 8, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री माधवी गणवीर जी की प्रकाशित रचना- खुदा के दरबार मे



नाम- माधवी गणवीर
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक-  खुदा के दरबार मे
सम्पर्क- 7999795542

गजल

हर चेहरे पर एक चेहरा मिलता है बाजार में,
देर है पर अंधेर नही खुदा के दरबार मे।
लाख छुपाओ पर छुपती नही असली सिरत,
किसी- किसी की तो मिलती नही सूरत किरदार में।
मसअला छोटा हो या बड़ा, हल हो ही जाता है,
जान क्यो गवाते हो फिर नफरतो- तकरार में।
सबको मिलना  ही है एक दिन खाक में,
क्यो दर्ज कराते हो नाम जुर्म के दावेदार मे।
कतरा-कतरा कुर्बान हो गया मुल्क पर,
लूट और बेइमानी से सराबोर खबरे है अखबार में।
जाया नही होने देंगे कुर्बानी उनकी
खड़े है मन्नत के धागें धामे खुदा के दरबार मे।
माधवी गणवीर

2 comments:

  1. शुभकामनायें ।

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  2. बेहतरीन महोदया बहुत खूब

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