नाम- माधवी गणवीर
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- खुदा के दरबार मे
सम्पर्क- 7999795542
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- खुदा के दरबार मे
सम्पर्क- 7999795542
गजल
हर चेहरे पर एक चेहरा मिलता है बाजार में,
देर है पर अंधेर नही खुदा के दरबार मे।
देर है पर अंधेर नही खुदा के दरबार मे।
लाख छुपाओ पर छुपती नही असली सिरत,
किसी- किसी की तो मिलती नही सूरत किरदार में।
किसी- किसी की तो मिलती नही सूरत किरदार में।
मसअला छोटा हो या बड़ा, हल हो ही जाता है,
जान क्यो गवाते हो फिर नफरतो- तकरार में।
जान क्यो गवाते हो फिर नफरतो- तकरार में।
सबको मिलना ही है एक दिन खाक में,
क्यो दर्ज कराते हो नाम जुर्म के दावेदार मे।
क्यो दर्ज कराते हो नाम जुर्म के दावेदार मे।
कतरा-कतरा कुर्बान हो गया मुल्क पर,
लूट और बेइमानी से सराबोर खबरे है अखबार में।
लूट और बेइमानी से सराबोर खबरे है अखबार में।
जाया नही होने देंगे कुर्बानी उनकी
खड़े है मन्नत के धागें धामे खुदा के दरबार मे।
खड़े है मन्नत के धागें धामे खुदा के दरबार मे।
माधवी गणवीर

शुभकामनायें ।
ReplyDeleteबेहतरीन महोदया बहुत खूब
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