Friday, October 11, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि विश्वनाथ देवांगन"मुस्कुराता बस्तर" की रचना- चिट्ठी... तुंहर नाव

नाम -: विश्वनाथ देवांगन"मुस्कुराता बस्तर"
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक : चिट्ठी... तुंहर नाव,
मोबाइल : 7999566755

"चिट्टी,,,तुंहर नांव "

मोहरी सुनई नई देवय,
न सियान के गोठ,
रिंगी चिंगी मोर गांव,
हर्रस-भर्रस होगे तोर म खोट,
डंगनी ले ओनहा,
कई पईत खाल्हे म झीकंव,
पचर्रा लागथे मन,
मेहर रना गेंव मया का लिखवं,
उरमाल सुग्घर डंगनी म हे,
अगोरा हे उरमाल गिर जातीस,
मोबाइल आगे हे येती वोती,
परबुधिया मोर गिंया ह मातीस,
कइसे खेलन हमन,
ओनहा म गुलान बाटी,
आरूग रिहिन हमर,
खरसी कोहा कन्हार माटी,
अबक-तबक कोदो-कुटकी,
तांते-तांत,अम्मट जम्मो खांय,
गोंदली,कलेवा,मया खोली,
कथरी गोदरी बिछौना आय,
कपिला चरे सुग्घर दुआरी,
कुकरा कुकरी के महिमा भारी,
कुटेला,करपा,कुची,
कुदाली,गैंती,गांसा,कुसियार,
कोटना,गरूवा,खुमरी,
अमरइया,कुंदरा,कुलूप अंधियार,
गिंया...,गरू निमगा रिहिस,
गुरहा गुड़ी,चिंगरा,
चुक चुक ले गांव,
जनम करम हमर मरम हे माटी,
चेतव चोला,चौसेला,छानी,
जतनन,,हमर गांव हमर माटी,
जबरजंग झांपी,टिकली,
फूंदरी,फूल कयना,
टुडुम ढेहरी मोर गांव,
बघवा....,,बइहा चेतव,
मोर चिट्ठी लिखेहंव तुंहर नाव,
बस्तर के नानकुल लइका,
मैं जम्मो ल परत हंव पांव,
जनम करम मोर मरम हे माटी,
महतारी तोला माथ नवांव |
©®मुस्कुराता बस्तर
       कोंडागांव,बस्तर,छत्तीसगढ़

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