Monday, October 28, 2019

राजस्थान से कवि कुमार तनसुख की रचना- संयुक्त परिवार

कुमार तनसुख
श्रीमाधोपुर,  राजस्थान
सम्पर्क:- 9351212400           
      कविता
                 शीर्षक
कितना अच्छा था वो अपना संयुक्त परिवार।
दादा, ताऊ, काका ओर बुआ
हर एक प्यारा था किरदार ।
बङे बुजुर्गों का था सम्मान
शर्म, हया आज्ञापालन छोटों का था संस्कार ...
कितना अच्छा था वो अपना संयुक्त परिवार ।।
पत्नी से बतियाना तो दूर
अपने बच्चे को गोदी में लेते भी झिझकते थे।
क्योंकि दादा , ताऊ या चाचा उन्हें खुद के बच्चों से ज्यादा अपना समझते थे।
आज कुछ बदला हुआ दोर है
बङो की अवहेलना करना
सिर्फ पत्नी ओर पत्नी से बात करने पर हर तरफ विशेष जोर है  ।।
घर की शान थे कभी जो दादा -दादी
आज वृद्धाश्रम की पहचान है।
बङे पापा,  बङी माँ  या कहूँ चाचा- चाची  का तो बस
रिश्तेदारों की सूची में नाम है  ।।
                            कुमार तनसुख

19 comments:

  1. बिल्कुल सही

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  2. आजकल के रिश्तों की सच्चाई को,और संयुक्त परिवार की महिमा को बहुत ही खूबसूरत शब्दों से पिरोया है कविराज जी।। आप बधाई के पात्र हैं, आगे भी बेहतरीन से बेहतरीन लिखें ये मेरी दुआ व अनेकानेक शुभकामनाएं आपको।।

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  3. सुन्दर ही नहीं, अति सुन्दर ।

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  4. Asa anmol word ki Kya tariff karwa I am totally speech less Bhai Shan gajabbb 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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  5. एकदम सही बात है... बहुत सुंदर और कम शब्दो मे आज ओर कल की तस्वीर दिखा दी बहुत खूब ।।।

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    1. धन्यवाद सखी 🙏🙏🙏

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  6. Bhai apne ekdum sahi baat kahi h aj k jamane ki

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