कुमार तनसुख
श्रीमाधोपुर, राजस्थान
सम्पर्क:- 9351212400
कविता
शीर्षक
कितना अच्छा था वो अपना संयुक्त परिवार।
श्रीमाधोपुर, राजस्थान
सम्पर्क:- 9351212400
कविता
शीर्षक
कितना अच्छा था वो अपना संयुक्त परिवार।
दादा, ताऊ, काका ओर बुआ
हर एक प्यारा था किरदार ।
बङे बुजुर्गों का था सम्मान
शर्म, हया आज्ञापालन छोटों का था संस्कार ...
कितना अच्छा था वो अपना संयुक्त परिवार ।।
हर एक प्यारा था किरदार ।
बङे बुजुर्गों का था सम्मान
शर्म, हया आज्ञापालन छोटों का था संस्कार ...
कितना अच्छा था वो अपना संयुक्त परिवार ।।
पत्नी से बतियाना तो दूर
अपने बच्चे को गोदी में लेते भी झिझकते थे।
क्योंकि दादा , ताऊ या चाचा उन्हें खुद के बच्चों से ज्यादा अपना समझते थे।
अपने बच्चे को गोदी में लेते भी झिझकते थे।
क्योंकि दादा , ताऊ या चाचा उन्हें खुद के बच्चों से ज्यादा अपना समझते थे।
आज कुछ बदला हुआ दोर है
बङो की अवहेलना करना
सिर्फ पत्नी ओर पत्नी से बात करने पर हर तरफ विशेष जोर है ।।
बङो की अवहेलना करना
सिर्फ पत्नी ओर पत्नी से बात करने पर हर तरफ विशेष जोर है ।।
घर की शान थे कभी जो दादा -दादी
आज वृद्धाश्रम की पहचान है।
बङे पापा, बङी माँ या कहूँ चाचा- चाची का तो बस
रिश्तेदारों की सूची में नाम है ।।
कुमार तनसुख
आज वृद्धाश्रम की पहचान है।
बङे पापा, बङी माँ या कहूँ चाचा- चाची का तो बस
रिश्तेदारों की सूची में नाम है ।।
कुमार तनसुख

अति सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteबिल्कुल सही
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏🙏🙏
Delete👍👍👍👍
ReplyDelete🙏🙏🙏
Deleteआजकल के रिश्तों की सच्चाई को,और संयुक्त परिवार की महिमा को बहुत ही खूबसूरत शब्दों से पिरोया है कविराज जी।। आप बधाई के पात्र हैं, आगे भी बेहतरीन से बेहतरीन लिखें ये मेरी दुआ व अनेकानेक शुभकामनाएं आपको।।
ReplyDeleteसुन्दर ही नहीं, अति सुन्दर ।
ReplyDeleteAsa anmol word ki Kya tariff karwa I am totally speech less Bhai Shan gajabbb 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteNice bhai ji
ReplyDeleteNice bhai ji
ReplyDeleteLajavab ,bhavnatamk,manbhavan.
ReplyDeleteVery very nice
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteJoint family...happy family
ReplyDeleteएकदम सही बात है... बहुत सुंदर और कम शब्दो मे आज ओर कल की तस्वीर दिखा दी बहुत खूब ।।।
ReplyDeleteधन्यवाद सखी 🙏🙏🙏
DeleteBhai apne ekdum sahi baat kahi h aj k jamane ki
ReplyDeleteVery nice bhaiji
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