कवियित्री का नाम : किरण सोम
राज्य-: छत्तीसगढ़
शीर्षक -: कैसे होही बस्तर के बिकास
मोबाइल नंबर :
*कैसे हो ही*
*बस्तर के बिकास*
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कैसे होही,
मोर बस्तर के विकास..?
संगी सोंचत हवं त,
आंखि ले आँसू आथे |
कतको दाई ददा मन,
दे दिन अपन बेटा के बलिदान,
कइसे होही,
हमर बस्तर के विकास,
जिहां वीर सपूत मन के,
लहू मिले हे माटी मा,
अउ कतिक मांग ही,
ये भूइयां हा,
वीर सपूत मन के बलिदान,
कइसे होगे हे मनखें हा,
थोकिन दुख पीरा नई लागे,
का होही हमर बस्तर के,
संगी सोचत हंव त,
आंखि ले आँसू आथे |
कइसे रहत होंही,वो दाई ददा,
जेखर बुढ़ापा के लाठी ह गवां गे,
कैसे रही,वो विधवा नारी हा,
जेकर हाथ के चूरी अउ,
मांग के सेंदूर मिटागे,
कईसे हो ही,
हमर बस्तर के विकास,
संगी सोंचत हंव त,
आंखि ले आँसू आथे |
*✒किरण सोम*
कांकेर,बस्तर,छत्तीसगढ़
Very nice kiran ji
ReplyDeleteHamar baster very
ReplyDeleteShandar jordar jabrdst kiran ji nice
ReplyDelete#good thinkings all the best nice msg 🙏
ReplyDeleteबहुत मार्मिक एंव विचारणीय रचना
ReplyDeleteसुंदर रचना है।।।
ReplyDeleteWell done keep it up
ReplyDeleteNice line didu
ReplyDeleteNice line ji
ReplyDeleteVery nice line
ReplyDeleteReally nice sentence
ReplyDeleteReally nice sentenc
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteबहुत सुन्दर भाव पूर्ण पंक्ति है बहन इसी तरह ई श्वर और आगे बढ़ने की शक्ति दे तु महे
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना है।
ReplyDeleteNice poem
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