Monday, October 14, 2019

जम्मू कश्मीर से कवयित्री कुसुम शर्मा अंतरा की रचना- ग़ज़ल

नाम---कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
विधा---ग़ज़ल

इश्क़ यूँ बावफ़ा नहीं होता
इसमें जो क़ायदा नहीं होता

हो गया इक दफ़ा जो प्यार हमें
क्या करें बारहा नहीं होता

खो दिए उससे हक़ सभी हमने
हमसे वो अब खफ़ा नहीं होता

हमपे कुछ एतबार करते तो
पेश यह हादसा नहीं होता

जो न दुनिया की फ़िक्र करते तुम
दरमियाँ फासला नहीं होता

अक्स दिल में उतारने वाला
हर दफ़ा आईना नहीं होता

नफ़रतों का चलन न होता तो
रंज का जलजला नहीं होता

कब कहाँ मौत आ मिले हमसे
ज़िन्दगी का पता नहीं होता

फुरसतें हों तो मिलना आकर तुम
वक़्त का कुछ पता नहीं होता

कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर

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