कवयित्री -का नाम प्रिया
राज्य-पंजाब
विधा-कविता
शीर्षक-मलाल करो
मो.नम्बर-
राज्य-पंजाब
विधा-कविता
शीर्षक-मलाल करो
मो.नम्बर-
हमारी वोटो से जीते हो ,
अब खून हमारा पीते हे।
अब खून हमारा पीते हे।
चुनाव दिनों में आते हो।
दिल जीत चले तुम जाते हो।
दिल जीत चले तुम जाते हो।
आगे पिछे क्या होता है,
मनुआ बेबस रोता है।
मनुआ बेबस रोता है।
पहले दास बन आते हो।
फिर आवाम से छुप जाते हो।
फिर आवाम से छुप जाते हो।
तुम ईमान पे ढब्बा हो,
भ्रष्ट,रिश्वत के अब्बा हो।
भ्रष्ट,रिश्वत के अब्बा हो।
तुम हमारा हिस्सा हो।
बनते नवाब किस्सा हो।
बनते नवाब किस्सा हो।
खत्म हुआ है राजतंत्र ये।
शुरु हो गया लोकतंत्र ये।
शुरु हो गया लोकतंत्र ये।
अब्राहिम के विचारो का ध्यान करो।
जीवन मे लोकतंत्र का सम्मान करो।
जीवन मे लोकतंत्र का सम्मान करो।
प्रिया,पंजाब

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