रचनाकार - गजेंद्र द्विवेदी "गिरीश"
राज्य - छत्तीसगढ़ (भिलाई 3)
संपर्क - 7000858588
विधा - गजल
शीर्षक - जनाब
आप यूँ मुगालते ना पालिये जनाब,
आईने के पास घूम आइये जनाब।१।
शाम ढल चुकी है सियाह रात सामने,
बुझ रहे दियों में तेल डालिए जनाब।२।
हुई नहीं कदर किसी की आपको कभी,
राह चलके ठोकरें तो खाईये जनाब।३।
निकालते हो रोज नुक्स हर बात में,
अपने गिरेबाँ में झांकिए जनाब।४।
अफ़सोस क्यूँ हो करते आसिम के लिए,
बीत गयी बात, मिट्टी डालिए जनाब।५।
हदों के पार जा रहे है आप बार बार,
गुजारिश है जल्द लौट जाइये जनाब।६।
कैसे समझाए फिर गिरीश आपको,
एक हाथ देके दूजे पाइये जनाब।७।
गजेंद्र द्विवेदी "गिरीश"
०१.१०.२०१९
आसिम= पापी, दोषी
Wah wah
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