Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि गजेन्द्र हरिहारनो " दीप " की रचना- आस्था के दीप


कवि :- गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
शीर्षक:- आस्था के दीप
स्थान:- डोंगरगांव
जिला:- राजनांदगांव
राज्य:- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 89622 39082
            89626 68826
           आस्था के दीप
आओ हम तलाश करें अपने उजास को
तम को जो नष्ट करे ऐसे प्रकाश को
आओ हम तलाश करें ..........
आस्था के दीप बुझे
     तम देखो गहराया
फर्क़ अपने बीच बढ़े
     दूर होता हर साया
नूतन हम सृजन करें विस्तृत आकाश को
तम को जो नष्ट करे ......
भावों के गीत जगे
    साँस साँस जाग उठे
नेह का संगीत सजे
    मन-मयूर नाच उठे
मिलकर हम सफल करें अपने प्रयास को
तम को जो नष्ट करे .........
जीवन की बगिया में
    फूल नये खिल जायें
खोये हुए मीत सभी
    फिर से यहीं मिल जायें
आकर ना लौट जाये ऐसा प्रकाश हो
तम को जो नष्ट करे ........
तम-हर तुझको
    हम सबका प्रणाम है
" दीप" के प्राण तुझे
      वन्दन और प्यार है
जीवन में हम ले आयें स्पंदन और श्वांस को
तम को जो नष्ट करे ऐसे प्रकाश को
आओ हम तलाश करें .........
                    कवि
       गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
          डोंगरगांव
      जिला :- राजनांदगांव
  राज्य :- छत्तीसगढ़

240 comments:

  1. आज दिल उदास है ,,,
    पर कहने को कुछ खास है ...।
    एक दिन मेरा भी था जब लोगो को मुझसे प्यार था,
    आज वही लोगो को मुझसे बात करने से इनकार है ...

    कहदो कोई, मुझे किसी के पैसों की जरुरत नही , बस प्यार का भूखा हूँ ,
    पर है इतना बिखरा हूँ आज, का आसुो को पीता हूँ…।

    आज दिल उदास है ,पर कहने को कुछ खास है ...।

    ReplyDelete
  2. आपके कविता आशावादी विचार ल ले के चलत हे अउ हमरो म आगू बढ़े के प्रेरणा जगावत हे।बहुत सुंदर रचना।बहुत बहुत बधाई

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर प्रेरणादायक।

    ReplyDelete
  4. Mesmerizing one Papaji...

    ReplyDelete
  5. Beautiful...Uncle

    ReplyDelete
  6. Very nice uncle jii

    ReplyDelete
  7. very nice uncle ji

    ReplyDelete
  8. Behetrin ��♥️

    ReplyDelete
  9. Woow sir, nice poem .... Bhut achha likha hai aapne

    ReplyDelete
  10. It's really a beautiful poem🤗🤗 papaji😍

    ReplyDelete
  11. आप सभी को बहुत बहुत साधुवाद

    ReplyDelete
  12. Atisundar����

    ReplyDelete
  13. Written great uncle

    ReplyDelete
  14. जला सको तो दीप जलाओ, दिल जलाना मत सीखो...

    मेरे प्रेरणा-स्रोत "दीप"जी को अद्वितीय रचना के लिए शत्-शत् नमन्...👏

    ReplyDelete
  15. Aao hum talaash kare.. ��

    ReplyDelete
  16. उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई सर

    🙏🙏🙏🙏

    ReplyDelete
  17. हर्ष यदुOctober 14, 2019 at 9:18 PM

    बहुत खूब����

    ReplyDelete
  18. Awesome poetry...very nice....

    ReplyDelete
  19. So sweet poem������

    ReplyDelete
  20. Lovely papaji .

    ReplyDelete
  21. ������
    GREAT LINES

    ReplyDelete
  22. Bahot accha hai uncle ji..

    ReplyDelete
  23. Bhot accha hai

    ReplyDelete
  24. Bahot accha hai uncle ji

    ReplyDelete
  25. Awesome ❤️ nice 👌 brilliant 👍 beautiful Line ❤️❤️👍

    ReplyDelete
  26. It's awesome ����

    ReplyDelete
  27. Sir it's melodious������

    ReplyDelete
  28. एक नम्बर hariharno uncle 👍👍👍👍👌👌👌👌

    ReplyDelete
  29. अच्छा विचार है।
    बहुत बढ़िया कविता।

    ReplyDelete
  30. मेरी कविता को पसंद करने हेतु आप सभी आत्मीयों को सादर साधुवाद । आपका स्नेह इसी प्रकार मिलता रहे ।

    ReplyDelete
  31. अध्भूत कविता ।

    ReplyDelete
  32. मनभावन

    ReplyDelete
  33. खूबसूरत

    ReplyDelete
  34. Mast ����

    ReplyDelete
  35. Atisundar kavita

    ReplyDelete
  36. ������

    ReplyDelete
  37. आप सभी पाठकों के प्रति हार्दिक साधुवाद

    ReplyDelete
  38. Atisundar kavita uncle ji

    ReplyDelete
  39. Accha hai...

    ReplyDelete
  40. Nice uncle ji

    ReplyDelete
  41. Acchi poem hai

    ReplyDelete
  42. Bhot accha hai Mausa ji

    ReplyDelete
  43. Bhalo aachche

    ReplyDelete
  44. Beautiful poem

    ReplyDelete
  45. Supratim kavita

    ReplyDelete
  46. Bahot acchi poem hai

    ReplyDelete
  47. Very nice poem uncle

    ReplyDelete
  48. Very good poem

    ReplyDelete
  49. Bhot sundar rachna hai uncle ji

    ReplyDelete
  50. Wah.. bhut sundar

    ReplyDelete
  51. सभी सुधि पाठकों को हार्दिक साधुवाद । आप सबका स्नेह व सम्बल इसी प्रकार मिलता रहे ।

    ReplyDelete
  52. मेरी रचना को पसंद करने वाले सभी सुधि जनों को सादर नमन

    ReplyDelete
  53. Surprised, marvelled, wondered,and dazzled..."ASTHA KE DEEP"

    ReplyDelete
  54. बहुत ही आनंद आया इस कविता को पढ़ के; हिंदी भाषा का कोई तोड़ नहीं है।

    ReplyDelete
  55. Bahut Sundar Rachna hai Uncle Ji

    ReplyDelete
  56. Beautiful lines great uncle jii

    ReplyDelete
  57. Wonderful ����

    ReplyDelete
  58. मेरी रचनाधर्मिता को सम्बल प्रदान करने वाले सभी सुधि पाठकों को सादर साधुवाद

    ReplyDelete
  59. मेरी रचनाधर्मिता को सम्बल प्रदान करने वाले आप सभी सुधि पाठको को सादर साधुवाद

    ReplyDelete
  60. Marvellous sir��

    ReplyDelete
  61. Awesome lines... ��

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...