Monday, October 28, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि डी राज सेठिया की कविता- गांव की नदी और मैं


कवि का नाम - डी राज सेठिया
स्थान - छत्तीसगढ़{कोंडागांव)
शीर्षक- गांव की नदी और मैं
सम्पर्क सूत्र- 8770278506
           
  
प्रबल हो जाते हैं,जब स्नेहबन्धन।
चला जाता हूं तट पर,करता हूं निवेदन।।1।।
निर्झरिणी तू मनोहर है,तनूजा तू चलायमान है।
कल कल करती ही,सुनाती मधुर गान है।।2।।
कहती है, प्यारी बचपन की यादें।
सुनाती है,लड़कपन की फरियादें।।3।।
जब देखता हूं तेरी रेत को,तो बचपन याद आती है।
रेत पर घर बनाना,नया भविष्य स्वप्न दिखाती है।।4।।
जब देखता हूं तेरी धाराओं को,जवानी याद आती है।
समेटकर रखना चाहता हूँ अपने आप को,पर बांध टुटती जाती है।।5।।
जब देखता हूँ तेरे किनारों को,वयता नजर आती है।
थामना चाहता हुँ जीवन के पल को,पर वह छूटती जाती है।6।।
जब जाता हूँ किसी की काठी पर,मुखमण्डल पर अव्यक्त वेदना होती है।
करुणामयी माँ की तरह,हे तटिनी हमें सुलाती है।।7।।
डी राज सेठिया
8770278506

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर
    😍😘

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  2. superbbbb dada aap to all in one hmare roll roll model ho ...

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  3. काबिले तारीफ भैया जी

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  4. लाजवाब, मनमोहक कविता👌👌

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  5. बहुत हि सुंदर कविता
    उम्मीद है कि ऐसे कविता आगे भी हमारे लिए लिखते रहेंगे 👌👌

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  6. बहुत सुन्दर कविता

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  7. बहुत सुंदर कविता लिखी है भैया जी आप ने 🙏

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  8. U r jiniyas mama ji

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