कवि का नाम - डी राज सेठिया
स्थान - छत्तीसगढ़{कोंडागांव)
शीर्षक- गांव की नदी और मैं
सम्पर्क सूत्र- 8770278506
प्रबल हो जाते हैं,जब स्नेहबन्धन।
चला जाता हूं तट पर,करता हूं निवेदन।।1।।
स्थान - छत्तीसगढ़{कोंडागांव)
शीर्षक- गांव की नदी और मैं
सम्पर्क सूत्र- 8770278506
प्रबल हो जाते हैं,जब स्नेहबन्धन।
चला जाता हूं तट पर,करता हूं निवेदन।।1।।
निर्झरिणी तू मनोहर है,तनूजा तू चलायमान है।
कल कल करती ही,सुनाती मधुर गान है।।2।।
कल कल करती ही,सुनाती मधुर गान है।।2।।
कहती है, प्यारी बचपन की यादें।
सुनाती है,लड़कपन की फरियादें।।3।।
सुनाती है,लड़कपन की फरियादें।।3।।
जब देखता हूं तेरी रेत को,तो बचपन याद आती है।
रेत पर घर बनाना,नया भविष्य स्वप्न दिखाती है।।4।।
रेत पर घर बनाना,नया भविष्य स्वप्न दिखाती है।।4।।
जब देखता हूं तेरी धाराओं को,जवानी याद आती है।
समेटकर रखना चाहता हूँ अपने आप को,पर बांध टुटती जाती है।।5।।
समेटकर रखना चाहता हूँ अपने आप को,पर बांध टुटती जाती है।।5।।
जब देखता हूँ तेरे किनारों को,वयता नजर आती है।
थामना चाहता हुँ जीवन के पल को,पर वह छूटती जाती है।6।।
थामना चाहता हुँ जीवन के पल को,पर वह छूटती जाती है।6।।
जब जाता हूँ किसी की काठी पर,मुखमण्डल पर अव्यक्त वेदना होती है।
करुणामयी माँ की तरह,हे तटिनी हमें सुलाती है।।7।।
करुणामयी माँ की तरह,हे तटिनी हमें सुलाती है।।7।।
डी राज सेठिया
8770278506
8770278506

बहुत सुन्दर
ReplyDelete😍😘
Bahut khub kaviraj
ReplyDeletesuperbbbb dada aap to all in one hmare roll roll model ho ...
ReplyDeleteकाबिले तारीफ भैया जी
ReplyDeleteलाजवाब, मनमोहक कविता👌👌
ReplyDeleteबहुत हि सुंदर कविता
ReplyDeleteउम्मीद है कि ऐसे कविता आगे भी हमारे लिए लिखते रहेंगे 👌👌
Sateyndra pandey
DeleteAdbhut...atisundar..
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteKhubsurat poem
Deleteबहुत सुन्दर कविता
ReplyDeleteWovv bhut sunder kavita
ReplyDeleteबहुत सुंदर कविता लिखी है भैया जी आप ने 🙏
ReplyDeleteU r jiniyas mama ji
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