Monday, October 28, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री आशा भारद्वाज की रचना- मासूम ट्विंकल


कवयित्री का नाम-श्रीमती आशा भारद्वाज
राज्य--छत्तीसगढ़
विधा--मुक्त छंद(कविता )
शीर्षक--मासूम ट्विंकल
मो. नम्बर-


धरती माँ की गोद में
होते ऐसे कृत्य ,
भूखे,दरिंदे हो नंगा
करते रहते नृत्य ।
नन्हीं-नन्हीं जानों को
नोंचते-खरोंचते ,
धर्म,मजहब के नाम पर
रक्त की होली खेलते ।
राम राज्य का डंका पीटते
रावण राज आ गया ,
भोग-लिप्सा में लिपटे
भोगी राज छा गया ।
हैवानियत करते इनका मन
नहीं पसीजा होगा ,
हाथ नही काँपे होगें
हब्सी बन नोचा होगा ।
किया क्या था गुनाह
मासूम कली ने ,
नरभक्षी बन किया
शिकार छली ने ।
धरा,गगन भी रोएँ होगें
मासूम के चीत्कार से,
चील की तरह झपटे
होगें प्रतिकार से ।
चुल्लु भर पानी में डूब मरो
देश के चौकीदारों ,
बंद करो ढोल पीटना
बड़बोले ठेकेदारों ।
निर्भया,ट्विंकल जैसे मासूम
कब तक लुटते रहेंगे ,
वहसी कुत्ते बन खिलती
कलियों को कुचलते रहेंगे।
कहाँ गए सतयुग,द्वापर
के रक्षक ,
कलयुग में बन बैठे
देखो वही अब भक्षक ।
होता हरण देख तैंतीस कोटि
देवताओं को लाज नहीं आई,
द्रोपदी को बचाने तो
अकेले पहुँचा कन्हाई ।
अब तो जागो पशु तुल्य मानव,
गुनाहगारों को फाँसी दो
है बने हुए जो दानव ।
   आशा भारद्वाज
सक्ती जाँजगीर (छ.ग.)

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