कवि - उत्तम साहू
पता- कोंडागांव (छत्तीसगढ़)
शीर्षक - "दाई के कोरा "
मो.नं.-
पता- कोंडागांव (छत्तीसगढ़)
शीर्षक - "दाई के कोरा "
मो.नं.-
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे ,
नौ महिना ले अपन कोख मा राखिस एखर करजा कइसे चुकाबे रे।।
नौ महिना ले अपन कोख मा राखिस एखर करजा कइसे चुकाबे रे।।
तोला दुनिया मा लाय बर मौत के दुआरी तक जइस जी,
खुद भुखे रहिके तोला एक कांवरा खवाइस जी,
जब तैं रोए तब तोला प्यार के लोरी सुनाइस जी,
तोर खातिर ओ ह अपन रात के नींद गवाइस जी,
दाई के हाथ के सुघर खाना अऊ कहां तै पाबे रे ।
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे।। १।।
खुद भुखे रहिके तोला एक कांवरा खवाइस जी,
जब तैं रोए तब तोला प्यार के लोरी सुनाइस जी,
तोर खातिर ओ ह अपन रात के नींद गवाइस जी,
दाई के हाथ के सुघर खाना अऊ कहां तै पाबे रे ।
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे।। १।।
तैं गलती करे तब प्यार से तोला समझाइस जी,
दुनिया के मायाजाल से दुर तोला प्रेम के पाठ पढ़ाइस जी,
तोर सुख बर मजदुरी करिस खुद ला आगि मा तपाइस जी,
कैरी-बैरी ले बचाय बर तोला काला टीका लगाइस जी,
दाई के मया अनमोल हे, तैं कहां समझ पाबे रे।
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे।। २।।
दुनिया के मायाजाल से दुर तोला प्रेम के पाठ पढ़ाइस जी,
तोर सुख बर मजदुरी करिस खुद ला आगि मा तपाइस जी,
कैरी-बैरी ले बचाय बर तोला काला टीका लगाइस जी,
दाई के मया अनमोल हे, तैं कहां समझ पाबे रे।
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे।। २।।
बाई के बुध मा आकर अपन दाई ला पीड़ा पहुंचाए रे,
अनपूर्णा माता ला तैं हा एक-एक कांवरा बर तड़पाए रे,
ममता के मुरत ला तैं हा वृद्धाश्रम म छोड़ आए रे,
लेकिन याद रखबे,
दाई ला ठोकर मार के ये दुनिया के ठोकर खाबे रे।
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे।। ३।।
अनपूर्णा माता ला तैं हा एक-एक कांवरा बर तड़पाए रे,
ममता के मुरत ला तैं हा वृद्धाश्रम म छोड़ आए रे,
लेकिन याद रखबे,
दाई ला ठोकर मार के ये दुनिया के ठोकर खाबे रे।
दाई के कोरा सरग बरोबर एला छोड़ कहां सुख पाबे रे।। ३।।
-उत्तम साहू
कोंडागांव (छत्तीसगढ़)
कोंडागांव (छत्तीसगढ़)

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