Monday, October 7, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि डॉ. आनंद जी सिंह की रचना- माँ तेरा आँचल

कवि का नाम- डॉ. आनंद जी सिंह
विधा- कविता
शीर्षक- "माँ तेरा आँचल"
राज्य- छत्तीसगढ़
मो.- 9424284155

माँ तेरे नैना भीग गए हैं,
माँ तेरा आँचल भीग गया है,
तेरा पैर भी कुछ सीझ गया है,
भाग्य भी कुछ खीझ गया है,
लगता है तू खूब रोई है,
जीवन में बहोत कुछ खोई है,
बहाने न बना
तेरा आँचल यूँ ही नहीं भीगा,
तेरा कर्तव्य तुझसे नहीं डिगा,
सब जानकर भी अन्जान है,
पापा की यादें ही तेरा जहान है,
बच्चों(हमको) को तूने पाला पोसा,
बड़ा किया,
अपने पैरों पर खड़ा किया,
फिर भी तू उदास है,
तेरी चिन्ता कोई ख़ास है,
नहीं कोई पास तेरे,
तीसरी पीढ़ी की चिन्ता भी तुझे घेरे,
बिछड़ों को मिलाती है,
सपनों को जगाती है,
अपने लिए बहाने बनाती है,
अपना दर्द हमेशा ही छुपाती है,
जब भी जाती है,किसी की डोली,
खाली रहती नहीं कभी तेरी थैली(बटुआ),
जो जहाँ आबाद है,
माँ निश्चित ही तेरा आशीर्वाद है।।

डॉ. आनंद जी सिंह
(सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जगदलपुर, जिला- बस्तर,छ. ग.)

4 comments:

  1. अति सुंदर रचना माँ की संपूर्ण मनोदशा ममता की सटीक व्याख्या

    ReplyDelete
  2. "माँ तेरा आँचल"
    सुंदर रचना

    ReplyDelete
  3. "माँ तेरा आँचल"
    सुंदर रचना

    ReplyDelete
  4. "माँ तेरा आँचल"
    सुंदर रचना

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...