कवि का नाम- डॉ. आनंद जी सिंह
विधा- कविता
शीर्षक- "माँ तेरा आँचल"
राज्य- छत्तीसगढ़
मो.- 9424284155
माँ तेरे नैना भीग गए हैं,
माँ तेरा आँचल भीग गया है,
तेरा पैर भी कुछ सीझ गया है,
भाग्य भी कुछ खीझ गया है,
लगता है तू खूब रोई है,
जीवन में बहोत कुछ खोई है,
बहाने न बना
तेरा आँचल यूँ ही नहीं भीगा,
तेरा कर्तव्य तुझसे नहीं डिगा,
सब जानकर भी अन्जान है,
पापा की यादें ही तेरा जहान है,
बच्चों(हमको) को तूने पाला पोसा,
बड़ा किया,
अपने पैरों पर खड़ा किया,
फिर भी तू उदास है,
तेरी चिन्ता कोई ख़ास है,
नहीं कोई पास तेरे,
तीसरी पीढ़ी की चिन्ता भी तुझे घेरे,
बिछड़ों को मिलाती है,
सपनों को जगाती है,
अपने लिए बहाने बनाती है,
अपना दर्द हमेशा ही छुपाती है,
जब भी जाती है,किसी की डोली,
खाली रहती नहीं कभी तेरी थैली(बटुआ),
जो जहाँ आबाद है,
माँ निश्चित ही तेरा आशीर्वाद है।।
डॉ. आनंद जी सिंह
(सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जगदलपुर, जिला- बस्तर,छ. ग.)
अति सुंदर रचना माँ की संपूर्ण मनोदशा ममता की सटीक व्याख्या
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"माँ तेरा आँचल"
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