नाम- माधवी गणवीर
शीर्षक- अक्सर
राज्य- छत्तीसगढ़
सम्पर्क-
शीर्षक- अक्सर
राज्य- छत्तीसगढ़
सम्पर्क-
तन्हाई को चीरते
उड़न खटोले पर सवार
जुर्र....से आती है
कागज की नाव
और कलम की कश्ती
को थामे बुनती है ख़्वाब..
मेरे मन के अंतर्मन
की मृग मरीचिका को
भर्मित करती
एकटक निहारती
ठहरती सुसकती, सकुचाती
मन के अथाह सागर में
गोते लगाती
चंचल शोख लहरो की
अटखेलियां करती
मन के सुने रेगिस्तान की
सिंचित ,प्रीत के गीत गाती
वीणा के तारो सी झनकार भरती
मृगनयनी सी कुचाले भर
मदमस्त चाल से सराबोर
इठलाती,बलखाती
कागज पर शब्द दर शब्द
बुनती जाती मेरी कविता।
उड़न खटोले पर सवार
जुर्र....से आती है
कागज की नाव
और कलम की कश्ती
को थामे बुनती है ख़्वाब..
मेरे मन के अंतर्मन
की मृग मरीचिका को
भर्मित करती
एकटक निहारती
ठहरती सुसकती, सकुचाती
मन के अथाह सागर में
गोते लगाती
चंचल शोख लहरो की
अटखेलियां करती
मन के सुने रेगिस्तान की
सिंचित ,प्रीत के गीत गाती
वीणा के तारो सी झनकार भरती
मृगनयनी सी कुचाले भर
मदमस्त चाल से सराबोर
इठलाती,बलखाती
कागज पर शब्द दर शब्द
बुनती जाती मेरी कविता।
माधवी गणवीर
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