नाम रचनाकार -नवनीता कटकवार
जिला -बालाघाट
राज्य -मध्यप्रदेश
संपर्क-
मेरी रचना
जिला -बालाघाट
राज्य -मध्यप्रदेश
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मेरी रचना
*ख्वाब*
ज़माने को आदत है आशिकों को तड़पाने की..
मुख़्तसर बाते जो ना समझ सके,वो दीवानाे की |
ज़माने को आदत है आशिकों को तड़पाने की..
मुख़्तसर बाते जो ना समझ सके,वो दीवानाे की |
सरेआम मिलने से ,हो जाती है, ज़माने में रुसवाई |
इज़ाज़त है तुम्हे, मेरे ख्वाबो में आ जाने की |
है ,चिरागे रौशनी से सराेबार मेरा आशियाना.
नज़र ना लगी ,अब तलक इसको ज़माने की|
इज़ाज़त है तुम्हे, मेरे ख्वाबो में आ जाने की |
है ,चिरागे रौशनी से सराेबार मेरा आशियाना.
नज़र ना लगी ,अब तलक इसको ज़माने की|
अब आ ,भी जाओ, तड़पाओ ना ,इस तरह
है ,कई बातें ,तुम से ,कहने और बताने की|
है ,कई बातें ,तुम से ,कहने और बताने की|
मिला है बड़ा हसीं साथ ,तेरा हमें कुछ लम्हों का जैसे मिल गई सौगाते हमें, ताउम्र मुस्कुराने की..
ना चाहे मेरा दिल, की ख्वाब ये कभी टूटे..
कि मुझे आदत है , ख्वाहिशों का बोझ उठाने की|
कि मुझे आदत है , ख्वाहिशों का बोझ उठाने की|
सुनो ..रोक लो ना इन्हे, ना मिले, आज फिर ..
इज़ाज़त चाँद, तारों को भी आसमा से जाने की|.
इज़ाज़त चाँद, तारों को भी आसमा से जाने की|.
ज़माने को आदत है, आशिकों को तड़पाने की|
मुख़्तसर बातें जो ना समझ सके,वो दीवानाे की|
मुख़्तसर बातें जो ना समझ सके,वो दीवानाे की|
सरेआम मिलने से हो जाती है ज़माने में रुसवाई|
इज़ाज़त है तुम्हे, मेरे ख्वाबों में आ जाने की|
इज़ाज़त है तुम्हे, मेरे ख्वाबों में आ जाने की|
बहुत सुंदर कविता
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