1.कवि का नाम - गिरिजा प्रसाद पाण्डे
2.शिर्षक - "मिट्टी के गणेश"
3.राज्य - छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव)
4.सम्पर्क - 9691760900
"मिट्टी के गणेश"
ना प्लास्टिक ना सोना-चाँदी,
न ज्यादा गणवेश,
ना ज्यादा हो आतिशबाजी,
और न ज्यादा विद्युत आवेश।
ना मन में छल-कपट हो,
और नही घृणा-द्वेष,
आओ मिलकर हम सब बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।
ना हो ज्यादा ढोल-ढमाके ,
और न ज्यादा हो डी.जे.की बेश,
सब मिलकर करें वंदना,
जय-जय विघ्नहर्ता गणेश।
बप्पा सबके हर लेंगे,
दुखः पिरा और कलेश,
आओ मिलकर हम सब बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।
मन मे हो संगठन की भावना,
सुनलो युवा विशेष,
दीन दुखियों की करो सहायता,
दिव्यांग,वृध्द,मानसीक अविवेक।
शिक्षा,स्वास्थ्य की अलख जगायें,
गाँव, शहर ,पारा,सकल परिवेश,
आओ मिलकर हम सब बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।
मन में नयी उमंग लिये ,
करो अथक प्रयास अशेष,
होगा ऐसा परिणाम सुन्दर,
पूजे जाओगे देश-विदेश।
रहो इस धरा पर बनके मानव,
करो कार्य विशेष,
आओ मिलकर हम बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।
पर्यावरण संतुलन पर करो ध्यान,
संतुलित सुन्दर होगा परिवेश,
गमले पर ही विसर्जन करें,
करके जलाभिषेक,प्रसन्न होगे महेश ।
इस मिट्टी पर करें पौधारोपण,
जो देंगे प्राण वायु और औषधि अवशेष,
आओ हम सब मिलकर बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।
गिरिजा प्रसाद पाण्डे
कोण्डागाँव(बस्तर)
नोटः- इस कविता का उद्देश्य किसी के आस्था एवं भक्तिभाव को ठेस पहुँचाना नही है,बल्की इस का उद्देश्य भक्तिभाव के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाये रखना है🙏
Superb
ReplyDeleteThank you jain ji
Deleteबहुत ही अच्छी कविता, पर्यावरण की सुरक्षा भी भगवान की भक्ति ही है।अतिसुन्दर पांडे जी।
ReplyDeleteधन्यवाद सिन्हा जी🙏
DeleteGajab pandye ji Mai Santosh
ReplyDeleteThank you sir ji🙏
Deleteबहुत ही प्यारी कविता है इस तरह की कविताओं को प्राकृतिक चीजों से जोड़कर बनाओ तो और भी अच्छा होगा
ReplyDeleteहाँ जरूर धन्यवाद🙏
Delete