Tuesday, September 3, 2019

छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव) से कवि गिरिजा प्रसाद पाण्डे की प्रकाशित कविता- मिट्टी के गणेश ( Published poem of poet Girija Prasad Pandey from Chhattisgarh (Kondagaon) - Ganesh of clay)

1.कवि का नाम - गिरिजा प्रसाद पाण्डे
2.शिर्षक - "मिट्टी के गणेश"
3.राज्य - छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव)
4.सम्पर्क - 9691760900
             

            "मिट्टी के गणेश"

ना प्लास्टिक ना सोना-चाँदी,
न ज्यादा गणवेश,
ना ज्यादा हो आतिशबाजी,
और न ज्यादा विद्युत आवेश।
ना मन में छल-कपट हो,
और नही घृणा-द्वेष,
आओ मिलकर हम सब बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।

ना हो ज्यादा ढोल-ढमाके ,
और न ज्यादा हो डी.जे.की बेश,
सब मिलकर करें वंदना,
जय-जय विघ्नहर्ता गणेश।
बप्पा सबके हर लेंगे,
दुखः पिरा और कलेश,
आओ मिलकर हम सब बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।

मन मे हो संगठन की भावना,
सुनलो युवा विशेष,
दीन दुखियों की करो सहायता,
दिव्यांग,वृध्द,मानसीक अविवेक।
शिक्षा,स्वास्थ्य की अलख जगायें,
गाँव, शहर ,पारा,सकल परिवेश,
आओ मिलकर हम सब बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।

मन में नयी उमंग लिये ,
करो अथक प्रयास अशेष,
होगा ऐसा परिणाम सुन्दर,
पूजे जाओगे देश-विदेश।
रहो इस धरा पर बनके मानव,
करो कार्य विशेष,
आओ मिलकर हम बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।

पर्यावरण संतुलन पर करो ध्यान,
संतुलित सुन्दर होगा परिवेश,
गमले पर ही विसर्जन करें,
करके जलाभिषेक,प्रसन्न होगे महेश ।
इस मिट्टी पर करें पौधारोपण,
जो देंगे प्राण वायु और औषधि अवशेष,
आओ हम सब मिलकर बनायें,
मिट्टी के गणेश ।।

                  गिरिजा प्रसाद पाण्डे
                   कोण्डागाँव(बस्तर)

नोटः- इस कविता का उद्देश्य किसी के आस्था एवं भक्तिभाव को ठेस पहुँचाना नही है,बल्की इस का उद्देश्य भक्तिभाव के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाये रखना है🙏

8 comments:

  1. बहुत ही अच्छी कविता, पर्यावरण की सुरक्षा भी भगवान की भक्ति ही है।अतिसुन्दर पांडे जी।

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    1. धन्यवाद सिन्हा जी🙏

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  2. बहुत ही प्यारी कविता है इस तरह की कविताओं को प्राकृतिक चीजों से जोड़कर बनाओ तो और भी अच्छा होगा

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    1. हाँ जरूर धन्यवाद🙏

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