Tuesday, September 3, 2019

छत्तीसगढ,बलौदाबाजार से कवि परमानंद निषाद की रचना- पिता का प्यार

कवि का नाम_ परमानंद निषाद
शीर्षक_ पिता का प्यार
राज्य_ छत्तीसगढ,बलौदाबाजार
मोबाइल _7974389033

         पिता का प्यार
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हर घर में होता है वो इंसान,
जिसे हम पापा कहते है ।

सभी की खुशियों का ध्यान रखते,
हर किसी की इच्छा पूरी करते,

खुद गरीब और बच्चों को अमीर बनाते,
जिसे हम पापा कहते है।

बड़ो की सेवा भाई-बहनों से लगाव,
पत्नी को प्यार,बच्चो को दुलार,

खोलते सभी ख्वाहिशों के द्वार
जिसे हम पापा कहते है।

बेटी की शादी,बेटो को मकान
बहुओं की खुशियां,दामादो का मान,

कुछ ऐसे ही सफर में,गुजारे वो हर शाम,
जिसे हम पापा कहते है।

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