कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची
चौहान
कविता-शांतिदूत
राज्य-36गढ़
संपर्क-
----------------------------------------
हर बार तुम आए
आकर चले गए
तुम्हारे आने और
जाने के दरम्यान
मांगते रहे तुमसे
भाई चारा और
सद्भावना।
लोग बांटते रहे
स्नेह और खुशियों
के लड्डू।
कहीं सिसकती रही
बेबस मां,भूख से
अकुलाता रहा
नन्हा बचपन।
तरसती रही
मुनिया स्कूल
जाने को।
तुम्हारे जाते ही
फिर पसरा सन्नाटा।
हे विनायक,
इस बार आना
दे जाना
पूरे साल भर
के लिए
असीम समृद्धि
बिलखती मां
को धूप का
छोटा टुकड़ा
मासुम को
मुस्कराता बचपन
मुनिया की थाली
में खुशियों की
पेंसिल
ताकि नीले आकाश
पर उड़ सकें
उन्मुक्त परींदे
और मेरा भारत
बन सके
पुनः श्च शांति दूत।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,36गढ़
चौहान
कविता-शांतिदूत
राज्य-36गढ़
संपर्क-
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हर बार तुम आए
आकर चले गए
तुम्हारे आने और
जाने के दरम्यान
मांगते रहे तुमसे
भाई चारा और
सद्भावना।
लोग बांटते रहे
स्नेह और खुशियों
के लड्डू।
कहीं सिसकती रही
बेबस मां,भूख से
अकुलाता रहा
नन्हा बचपन।
तरसती रही
मुनिया स्कूल
जाने को।
तुम्हारे जाते ही
फिर पसरा सन्नाटा।
हे विनायक,
इस बार आना
दे जाना
पूरे साल भर
के लिए
असीम समृद्धि
बिलखती मां
को धूप का
छोटा टुकड़ा
मासुम को
मुस्कराता बचपन
मुनिया की थाली
में खुशियों की
पेंसिल
ताकि नीले आकाश
पर उड़ सकें
उन्मुक्त परींदे
और मेरा भारत
बन सके
पुनः श्च शांति दूत।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,36गढ़
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