Friday, September 13, 2019

महाराष्ट्र से कवि संजय जैन की रचना- कैसे होते है अपने

नाम संजय जैन
राज्य महाराष्ट्र
मो. 9987699021
शीर्षक *कैसे होते है अपने*
विधा कविता

कैसे होते है अपने,
में तुम्हे बताता हूँ।
इस जालिम दुनियां का,
हाल सुनाता हूँ।
बड़ा दर्द होता है तब,
जब अपना ही अपनो खा जाता है।
और पता भी नही चल पाता है।।

हकीकत यदि जाने तो
बहुत ही शातिर होते है।
अपने बातो से अपनो को,
ही निपटा देते है।
शायद इसी को हम
दुनियां कहते है।
जो किसी की भी
नही होती है।।

मिले फायदा तो अपनो,
को भी नही छोड़ती है।
रखकर पैर सिर पर,
उसके निकल जाते है।
और अपनी कामयाबी का,
ज़श्न मनाते है।
ऐसे लोगो से कोई
बच नही पाता है।
क्योकि ये,
आस्तीन के जो सांप होते है।
जो कभी भी काट सकते है।।

आज कल आदमी ही,
आदमी को काटता है।
और अपनी इंसानियत को,
भूलाये जा रहा है।
यहां कोई किसका नही है भाई,
क्योकि रिश्ते ही स्वार्थ के होते है।।

तभी तो हम कहते है कि,
दुनियां बहुत जालिम है।
जो अपनो को भी नही छोड़ती है।
और मिला मौका तो उसे,
तुरंत भूना लेती है।
और अपनी काली करतूते,
सभी को दिखा देते है।।

संजय जैन (मुम्बई)
13/09/2019

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