Sunday, September 1, 2019

जुगानी कैंप छत्तीसगढ़ से कवि स्वपन बोस की कृति भगवान कहां हो तुम..!

नाम श्री स्वपन बोस
शिर्षक ,, भगवान कहां हो तुम,,
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़
मोबाइल ९३४०४३३४८१
््््््््््््््््््
कविता
        भगवान कहां हो तुम  ्््््््््््््््््््
कहते हैं आपने ही सारा जगत बनाया ,
फिर कहां हो भगवान तुम ,
खोजता हूं, पत्थर की मूरत, में क्या वह भी नहीं तुम ,
फिर भगवान कहां हो तुम ,
सारे जहां में ,न जाने कितने धर्म , कितने मंदिर,
हैं फिर भी  ,तेरे जगत
में लोग दुःख दर्द को पाते है,
रोग, पीड़ा से न जाने हर रोज कितने लोग मर जाते हैं ,
कमाने को माया , पद और
प्रतिष्ठा लोग हर जतन कर
जाते हैं ।
पर भगवान तेरा नाम कोई
विरला ही लेता है ।
जाते भी हैं दरबार में तेरे
वह भी हम इच्छा पुरी, करने मन्नत मांगते हैं ,
मन और लालच , इच्छा ही, जिंदगी है हमारी वह, भी तुझे भुल जाते हैं ।
कहते कुछ मुनि जन,
तू इंसान के दिल में रहता है ,
दिल तो सबका  खाली है, यह मतलब
का दुनिया कहता है ।
अगर तू भगवान है जगत में , फिर लोग यह क्यो
मरते हैं ,
राजा कभी रंक  हो जाता रंक कभी राजा तेरे चाहने वाले हर पल दुःख में ही क्यो रहते हैं ।
राम तो राजा था
उसे वनवास जाना पड़ा था
कृष्ण तो थे तेरे ही प्यार के मूरत फिर क्यो उसे भी वृंदावन छोड़ मथुरा में जाना  पड़ा था ।
आगे गौतम बुद्ध हुए उसे
भी राज पाठ , बच्चे वधू छोड़ना पड़ा था ,
है कहा भगवान तू तेरा ठिकाना ढूंढ़ता हूं ।
कभी , मंदिर मस्जीद, और
गिरजा घरों में जाता हूं ।
है कहा तू ढूंढ नहीं पाता हूं।
अब तो जीवन जाने को है,
आंख में लग गए चश्मा,
बाल भी पकने लगे हैं ,
हाथ पैरों में रहता है दर्द,
दांत भी झड़ने लगे हैं ,
काटता हूं डाक्टर वे़धो
के चक्कर , अंतिम समय,
आने लगे हैं ,
सोच रहा हूं ,आया था खाली हाथ ,खाली हाथ ही जाना पड़ेगा ,लालच इच्छा
के बोझ छोड़ न सका अगर  इस जीवन में फिर
नया जीवन लेना पड़ेगा ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...