कवयित्री -सावित्री मिश्रा
सम्पर्क -
शीर्षक -नारी
राज्य-ओडिशा ,झारसुगुड़ा
नारी
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शीर्षक -नारी
राज्य-ओडिशा ,झारसुगुड़ा
नारी
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
सरस्वती का रूप हो तुम
लक्ष्मी का स्वरुप हो तुम
बढ़ जाये जब अत्याचारी
बन जाती तब दुर्गा-काली
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .
खुशियों का संसार हो तुम
प्रेम का आगार हो तुम
घर आँगन को रोशन करती
सूरज की दमकार हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
ममता का सम्मान हो तुम
संस्कारों की जान हो तुम
स्नेह,प्यार और त्याग की
इकलौती पहचान हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .
कभी कोमल फूल गुलाब सी
कभी शक्ति के अवतार सी
नारी तेरे रूप अनेक
तू ईश्वर के चमत्कार सी.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा ,ओडिशा
नारी तुम हो सबकी आशा.
सरस्वती का रूप हो तुम
लक्ष्मी का स्वरुप हो तुम
बढ़ जाये जब अत्याचारी
बन जाती तब दुर्गा-काली
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .
खुशियों का संसार हो तुम
प्रेम का आगार हो तुम
घर आँगन को रोशन करती
सूरज की दमकार हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
ममता का सम्मान हो तुम
संस्कारों की जान हो तुम
स्नेह,प्यार और त्याग की
इकलौती पहचान हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .
कभी कोमल फूल गुलाब सी
कभी शक्ति के अवतार सी
नारी तेरे रूप अनेक
तू ईश्वर के चमत्कार सी.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा ,ओडिशा
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