Monday, September 30, 2019

राजस्थान से कवि बजरंग लाल सैनी "वज्रघन" की रचना- रिश्ते

बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य - - राजस्थान।
शीर्षक - - रिश्ते
मोबाईल 8769764786

अच्छे लगते हैं अपनेपन से महकते रिश्ते,
प्रेम, सहयोग, सद्भाव से चहकते रिश्ते,
निःस्वार्थ भाव मनुहार से लहकते रिश्ते,
संस्कारों की पावन छाया में पलते रिश्ते,
स्व-पर त्याग, हम के भाव में बढ़ते रिश्ते,
आज जाने किसकी नज़र लगी, लगे दरकने रिश्ते,
मोबाईल, सिनेमा ने आग लगा दी संस्कारों में,
संस्कारों की होली में दहक-दहक दहकते रिश्ते,
विश्वास, अपनापा मुख छुपाए कहीं खो गया,
शक, अविश्वास के फेर में, पल-पल बिखरते रिश्ते,
कहता वज्रघन यों, सुन लो बात हमारी,
बचाना है समाज तो, बचा लो पावन रिश्ते।

9 comments:

  1. बहुत खूब लिखा है आपने

    ReplyDelete
  2. धन्यवाद भाई जी

    ReplyDelete
  3. अच्छे लगते हैं अपनेपन से महकते रिश्ते
    बहुत खूब

    ReplyDelete
  4. रिश्तों की वर्तमान स्थिति का सटीक विश्लेषण और उन्हें बचाने का आग्रह, वाह गुरु। 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹

    ReplyDelete
  5. सुन्दर कविता। रिश्ते केवल नाम के ही रह गए हैं। बिल्कुल सर बचाना ही होगा इन बिखरते रिश्तों को। मोबाइल और सिनेमा ने तो वास्तव में ही रिश्तों को आग लगा दी। 'दुःखद'

    ReplyDelete
  6. बहुत शानदार एवं शुभकामनाएं

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...