बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य - - राजस्थान।
शीर्षक - - रिश्ते
मोबाईल 8769764786
अच्छे लगते हैं अपनेपन से महकते रिश्ते,
प्रेम, सहयोग, सद्भाव से चहकते रिश्ते,
निःस्वार्थ भाव मनुहार से लहकते रिश्ते,
संस्कारों की पावन छाया में पलते रिश्ते,
स्व-पर त्याग, हम के भाव में बढ़ते रिश्ते,
आज जाने किसकी नज़र लगी, लगे दरकने रिश्ते,
मोबाईल, सिनेमा ने आग लगा दी संस्कारों में,
संस्कारों की होली में दहक-दहक दहकते रिश्ते,
विश्वास, अपनापा मुख छुपाए कहीं खो गया,
शक, अविश्वास के फेर में, पल-पल बिखरते रिश्ते,
कहता वज्रघन यों, सुन लो बात हमारी,
बचाना है समाज तो, बचा लो पावन रिश्ते।
Great sir
ReplyDeleteअति सुंदर
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा है आपने
ReplyDeleteधन्यवाद भाई जी
ReplyDeleteअच्छे लगते हैं अपनेपन से महकते रिश्ते
ReplyDeleteबहुत खूब
रिश्तों की वर्तमान स्थिति का सटीक विश्लेषण और उन्हें बचाने का आग्रह, वाह गुरु। 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteसुन्दर कविता। रिश्ते केवल नाम के ही रह गए हैं। बिल्कुल सर बचाना ही होगा इन बिखरते रिश्तों को। मोबाइल और सिनेमा ने तो वास्तव में ही रिश्तों को आग लगा दी। 'दुःखद'
ReplyDeleteबहुत शानदार एवं शुभकामनाएं
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