Monday, September 30, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री बरखा भाटिया की रचना- ग़ज़ल

कवयित्री का नाम -बरखा भाटिया
कोण्डागाँव छत्तीसगढ़
     ग़ज़ल

भटकते रहे रिश्ते आसपास जुदा से
ज़िंदगी को रुलाते रहे अहसास जुदा से

मायूस आँखों में भरे, टूटे से ख्वाबों ने
अश्कों पे लुटाए हैं उजास जुदा से

सिमट गई शरमाके, उदासियाँ मेरी
जब चेहरे देखे मैने, कुछ उदास जुदा से

रंगो-नूर थे छलक रहे, हर शबनमी गुल से
कहीं दूर थे सिसक रहे पलाश जुदा से

हर आँख है उम्मीद तो, हर साँस है सपना
दुनिया में लोग जितने हैं, बेआस जुदा से
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