नाम : संजय जैन
राज्य: मुम्बई महाराष्ट्रा
मो. 9987699021
मेल आई डी: sanjayjain492@gmail.com
शीर्षक : *दर्द*
विधा : गीत
किसी के दर्द को हम
कैसे अपना बनाये।
मोहब्बत के गीतों से
उसे कैसे बहलाये।
जिससे उसका दुख दर्द
दूर हो जाये।
और वो भी साथ मेरे
मोहब्बत के गीत गाये।।
तेरी सांसो का हर
एहसास है मुझको मोहतर्मा ।
तुझे अपने दिल मे
बैठके जो रखा है।
तेरी दिल लगी पर
एतेबार है मुझको पूरा।
फिर न जाने कौनसा गम
छुपाकर दिल मे बैठे हो।।
जब में तेरे साथ हूँ तो
फिर क्यो तुम उदास होते हो।
हंसते हुए चेहरे पर उदासी
अच्छी नही देखती।
माना कि तेरी जिंदगी
ग़मो में बीती है।
पर अब तो खुशियों का
तेरा दौर आ गया।।
क्योंकि तेरे पर रहमत
उसकी बरस रही है।
तो अब क्यो तेरे पर हो
अंधेरों का कोई साया।
इसलिए संजय खड़ा है
हर दम साथ तेरे।
तो आ जाओ मेरे बाहों में
मेरी दिलरुबा बनकर।
निभाउंगा साथ तेरा
बनकर में हमसफर।।
जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)
02/09/2019
कबी की रचना अदभुत
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