नाम-पवन गौतम बृजराही बमूलिया।
राज्य-राजस्थान। मो 9116488506
विषय --आत्मा (दर्शन)विधा -गीतिका।
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गीत (आत्मा)
(श्रृंगार से दर्शन तक)
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ढूँढता ही रहा वो मचलती रही ।
आत्मा आत्मा को सँवरती रही ।
प्रीति पत्रावली के दस्तख़त सब किये !
नेह से हाँ निमन्त्रण के खत सब दिये !
प्राण तक आवरण के हिय रत किये ,
आत्मा के प्रबोधन के अभिमत दिये !!
छोर पाया ना मिल !
पुृ्ष्प पाया ना खिल!!
चक्रवाती भँवर में उलझती रही ।
आत्मा आत्मा को सँवरती रही ।
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वेदना की तड़प आती जाती रही !
सारी संवेदनाऐं सताती रही !
अर्चनाएं करी प्रार्थनाएं करी ,
वन्दनाएं हुई साधनाएं करी !!
मन से प्राणों तलक !
योग ध्यानों तलक !!
ये हवन में जलती सुलगती रही ।
आत्मा आत्मा को सँवरती रही ।
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ज्ञान से भक्ति से ना मिली प्रियतमा ,
जप किये तप किये ना मिली मनोरमा !
बन्द आँखोंसे क्षणभर दिखीअरुणिमा!
कीट जलते रहे तू जली जब शमाँ !!
सब पठन कर लिये !
और जतन कर लिये !!
घन में तड़िता गरजती कड़कती रही ।
आत्मा आत्मा को सँवरती रही ।।
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ढूँढ़ता ही रहा वो मचलती रही ।
आत्मा आत्मा को सँवरती रही ।
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रचनाकार--
पवन गौतम बृज राही बमूलिया
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