Monday, September 23, 2019

(दरभंगा) बिहार से कवयित्री कंचन प्रभा (शिक्षिका) की रचना- मैं तन्हा हूँ

कवयित्री-कंचन प्रभा (शिक्षिका)
राज्य-(दरभंगा) बिहार
शीर्षक- मैं तन्हा हूँ
सम्पर्क-

            *मैं तन्हा हूँ*
      इन दिनो मैं तन्हा हूँ
  हर सोच बुझी बुझी सी है
  वक़्त गुजरता है सामने से
       अजनबी की तरह
लेकिन मैं उसे कह नहीं पाती
     क्योकिं मैं तन्हा हूँ
इस तन्हाई में कभी आपकी
      यादों का कोई काफिला
गुजरता है मेरी कविताओं से
   तो लगता है मैं तन्हा नहीं
मेरे पास है एक समंदर
   मेरे पास है आश्मां
लेकिन काफिला फिर
        गुजर गया
और फिर मैं
      तन्हा हो गई
*कंचन प्रभा, दरभंगा, बिहार* ✍

32 comments:

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    1. बहुत खूब मैडम
      🌹🌹🌹💞💞💞💞🌹🌹💞

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