कवयित्री-कंचन प्रभा (शिक्षिका)
राज्य-(दरभंगा) बिहार
शीर्षक- मैं तन्हा हूँ
सम्पर्क-
राज्य-(दरभंगा) बिहार
शीर्षक- मैं तन्हा हूँ
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*मैं तन्हा हूँ*
इन दिनो मैं तन्हा हूँ
हर सोच बुझी बुझी सी है
वक़्त गुजरता है सामने से
अजनबी की तरह
हर सोच बुझी बुझी सी है
वक़्त गुजरता है सामने से
अजनबी की तरह
लेकिन मैं उसे कह नहीं पाती
क्योकिं मैं तन्हा हूँ
इस तन्हाई में कभी आपकी
यादों का कोई काफिला
क्योकिं मैं तन्हा हूँ
इस तन्हाई में कभी आपकी
यादों का कोई काफिला
गुजरता है मेरी कविताओं से
तो लगता है मैं तन्हा नहीं
मेरे पास है एक समंदर
मेरे पास है आश्मां
तो लगता है मैं तन्हा नहीं
मेरे पास है एक समंदर
मेरे पास है आश्मां
लेकिन काफिला फिर
गुजर गया
और फिर मैं
तन्हा हो गई
गुजर गया
और फिर मैं
तन्हा हो गई
*कंचन प्रभा, दरभंगा, बिहार* ✍
Bohot hi achha.
ReplyDeleteThanku
DeleteBahut khub
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteबहुत खूब मैडम
Delete🌹🌹🌹💞💞💞💞🌹🌹💞
Bht khubsurat rachna
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteBahut badhiya prayash hai
ReplyDeleteBhot badhiya
ReplyDeleteThanku
DeleteNice
ReplyDeleteWah sahi kaha 👌
ReplyDelete🙏🙏
DeleteHat's off....
ReplyDelete🙏🙏🙏
DeleteGood 👍
ReplyDeleteबहुत हि सुन्दर 👌👌👌
Delete🙏🙏🙏🙏
DeleteAti Sundar
ReplyDelete🙏🙏
DeleteBohot hi acchi hai
ReplyDeleteThanku
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ReplyDeleteनायाब कविता
ReplyDeleteधन्यवाद
Delete#fabulous
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteSupbbb creativity
ReplyDeleteThanku
DeleteBahut khub
ReplyDeleteThanks
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