1.कवि का नाम - गिरिजा प्रसाद पाण्डे
2.शिर्षक - "तार"
3.राज्य - छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव)
4.सम्पर्क - 9691760900
"तार"
तेरी दिल के तार से ,
जुड़गये मेरे दिल के तार,
यूँ जीना मुस्किल है तुझबीन,
जैसे विद्युत बिना सुनी तार ।
चाहे हो या न हो,
मोटर,बंगला,और कार,
बस तेरा साथ हो जिन्दगी भर,
या हो हरदम तेरी बातों कि तार।।
तुझको ख्वाबों में सजाके,
मैं बनजाता हूँ करतार,
अपने दिल के बस्ती के,
हम ही हैं पाण्डे सरदार ।
तब तक हूँ मै अधूरा,
जब तक न मिलजाय तेरी तार,
बन जा तू मेरे सपनों की रानी,
ना कर मेरे सपनों को तार-तार ।
डिजीटल दुनिया की मोहमाया से,
जुड़ गये क्या तेरे दिल के तार,
इस दुनिया मे मरीज बहुत हैं
दर्दे दिल के और थोड़े मानसीक बिमार।
हो रही है हैक लोगों की,
भावनात्मक तारों से तार,
तारों कि दुनिया में हो रही,
रिस्तों की तार-तार ।
जुड़ रहे हैं लोग दुनिया से,
करके झुठे,फेक सम्प्रेषण-संचार,
परन्तु टुट रहा है परिवार,
अपने में व्यस्त हैं रिस्तेदार।
लोग कर रहे हैं दिखावा,
करके अपनों से दिदार,
झुठे हैं ये सब फसाने,
और झुठी है यैसी प्यार।
आओ सब मिलकर जोड़ें,
दिल से दिलों की अच्छी तार,
जिने के केवल दिन हैं चार,
करलो दोस्ती बनाओ यार ।
घर-परिवार को समय दो,
जो करते तुमसे सच्चा प्यार,
वास्तविक्ता को समझो यार,
काल्पनिक दुनिया से निकलो बहार ।।
गिरिजा प्रसाद पाण्डे
कोण्डागाँव(बस्तर)
Behatrin
ReplyDeleteThank you
Deleteबहुत बढ़िया ...
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